संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
रंगों का पर्व होली नजदीक आते ही नगर के बाजार रंग, गुलाल और पिचकारियों से सज गए हैं। हालांकि अभी इनकी बिक्री अपेक्षाकृत कम है, लेकिन कारोबारियों को उम्मीद है कि होली से दो दिन पहले बाजार जरूर तेजी पकड़ेगा। कोरोना की दहशत खत्म होने के बाद पूरे दो साल बाद लोग खुलकर होली खेलने के लिए खासे उत्साहित हैं।
इस बार होली पर धमा-चौकड़ी मचने की एक वजह हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव भी हैं। विजयी पार्टी के समर्थक इस बार होली को यादगार बनाने की तैयारी कर रहे हैं। वैसे भी होली के त्योहार को उल्लास और मस्ती का प्रतीक माना जाता है। इसे लेकर युवाओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है।
होली में अभी आठ दिन बाकी हैं, लेकिन नगर के बाजार होली पर परोसे जाने वाले खाने-पीने के सामान के अलावा रंग, गुलाल और पिचकारियाें से सजे हुए हैं। तरह-तरह के मुखौटे और मस्ती का अन्य सामान भी दुकानों पर दिख रहा है। हालांकि दुकानदारों का कहना है अभी बिक्री कुछ खास नहीं है, लेकिन त्योहार से पहले खरीदारी जरूर तेज होगी।
इधर, घरों में महिलाओं ने ने होलिका दहन के लिए गोबर की गूलरी बनानी भी शुरू कर दी हैं। नगर के चौराहों और निर्धारित स्थानों पर भी होलिका दहन के लिए लकड़ियां रखी जाने लगी हैं।
पहले लकड़ी जुटाने के लिए मेहनत करते थे युवा
पहले होलिका दहन से पूर्व लकड़ी के इंतजाम के लिए युवक रात में कुल्हाड़ी लेकर निकलते थे और पेड़ों से लकड़ी काटकर लाते थे। दो-चार दिन में ही होलिका दहन स्थल पर हरी लकड़ियों का ढेर लग जाता था। इसके बाद बाजार से थोड़ी सूखी लकड़ी लाकर होलिका दहन होता था।
मोहल्ले में जिसके पेड़ होते थे, उनके मालिक पूरी रात जागकर उनकी सुरक्षा करते थे। इसके बावजूद युवाओं की टोलियां लकड़ी काटने में कामयाब हो जाती थीं, लेकिन अब ऐनवक्त पर आरा मशीनों से लकड़ियां खरीदकर लाई जाती हैं और होलिका दहन की रस्म निभाई जाती है। संवाद