हाथरस : काका हाथरसी के साथ मंच पर मौजूद पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी। (फाइल फोटो)
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हाथरस से गहरा नाता रहा है। राजनीतिक कार्यक्रम में तो अटल जी कई बार यहां आए। एक कवि सम्मेलन में वर्ष 1994 में वह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और काका हाथरसी के साथ उन्होंने मंच साझा किया था। इस कार्यक्रम में अटल जी ने काका हाथरसी की जमकर तारीफ की थी।
समारोह में अटल जी से कविता की फरमाइश की जाने लगी। उन्होंने एक नहीं, तीन कविताएं प्रस्तुत कीं। कवि सम्मेलन में अटल जी ने गीत नहीं गाता हूं, बेनकाब चेहरे है, दाग बड़े गहरे हैं। टूटता तिलस्म आज सच से भय खाता हूं, गीत नया गाता हूं, सुनाकर तालियां बटोरीं।
पूर्व पालिकाध्यक्ष के आवास पर खाई रबड़ी
हाथरस। पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य की अहम यादें अटल जी से जुड़ी हुई हैं। अटल बिहारी वाजपेयी जब 1994 में समारोह में हाथरस आए तो रमेशचंद्र आर्य के आवास पर रुके और विश्राम किया। भोजन किया। भोजन में रबड़ी उन्हें बेहद पसंद आई। रबड़ी की खूब तारीफ की। प्रकाशवती आर्य, सुनीत आर्य और अभिषेक रंजन आर्य से काफी देर बात की। शहर के गली भुर्जियान स्थित बांठिया हाउस से पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का आना-जाना रहा। वर्ष 1964 और उसके बाद अटल जी की कई बार यहां आए। संवाद