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हाथरस : पुरदिलनगर बवाल में पोस्टर थामने का आरोपी गिरफ्तार

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हाथरस : कस्बा पुरदिलनगर में मुस्लिम बहुल इलाके में बंद रहीं दुकानें। संवाद - फोटो : SIKANDHRA RAHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)।
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पहले से ही मंदी और उपेक्षा की मार झेल रहे पुरदिलनगर के मशहूर मूंगा-मोती कारोबार को जुमे की नमाज के बाद हुए बवाल की नजर लग गई। बवाल तो शांत हो गया, लेकिन उसके बाद पुलिस की सख्ती के चलते कस्बे के बाशिंदे घर-वार छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर हो गए हैं। कस्बे के बाजार तो खुल रहे हैं, लेकिन दिन भर सन्नाटा पसरा रहता है। रविवार को भी मुस्लिम बहुल इलाके की दुकानें बंद रहीं। पुलिस ने जुलूस में पोस्टर हाथ में लेकर लेकर चलने के आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस तरह इस बवाल में अब तक 51 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
शुक्रवार को कस्बे में जुमे की नमाज के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग हजरत मोहम्मद साहब पर भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा की टिप्पणी के विरोध में धारा 144 का उल्लंघन कर सड़क पर उतर आए थे। नारेबाजी के बीच इन लोगों ने पुतला भी फूंका था। पुलिस बल ने जब इन्हें हटाने के लिए सख्ती बरती तो इस दौरान पथराव भी हो गया था। हालांकि इसके बाद पुलिस बल ने सख्ती बरतते हुए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया था। पुलिस दो दिनों से इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। शनिवार तक 50 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। रविवार को पुलिस ने जमाल उर्फ जमालुद्दीन पुत्र साबू उर्फ साबुद्दीन निवासी मोहल्ला इस्लामनगर को गिरफ्तार कर लिया। जमाल पर हाथों में पोस्टर लेकर चलने का आरोप है। चौकी प्रभारी सोनू राजौरा ने उसकी गिरफ्तारी की।
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जुलूस के साथ हाथों में पोस्टर लेकर चल रहे जमाल उर्फ जमालुददीन पुत्र साबू उर्फ साबुददीन निवासी मोहल्ला इस्लामनगर को चौकी प्रभारी सौनू राजौरा ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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गिरफ्तारी के भय से काफी लोग घरों को छोड़कर चले गए हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों की दुकानें बंद रहीं। हालांकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि जो लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। वीडियो फुटेज अन्य सबूतों के आधार पर ही गिरफ्तारी होगी। काफी लोगों को छानबीन कर छोड़ा जा रहा है। कस्बे में कांच की भट्ठियां भी बंद चल रही हैं। हालांकि यहां का मूंगा-मोती उद्योग पहले ही चौपट हो चुका है। जो थोड़ा-बहुत काम बचा है, वह भी बवाल के बाद थम गया े। बैंक व अन्य सरकारी कार्यालयों में भी कर्मी कम ही आ रहे हैं। संवाद
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