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तंत्र से गण की जंग: संघर्ष कर हासिल किया मुकाम, स्थापित किए नए आयाम

Thu, 26 Jan 2023 07:00 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस में ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने तंत्र से लड़ाई लड़ कर अपना मुकाम हासिल किया है। आज हम ऐसे लोगों का जिक्र करने जा रहे हैं, जिन्होंने तंत्र से लड़कर अपने संघर्ष से नए आयाम स्थापित किए हैं।
 
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नगला मया में खारे पानी की समसया को लेकर धरना देते चंद्रपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूरे देश में आज गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। देश में लोक की सेवा के लिए तंत्र बना हुआ है, इसीलिए हमारे यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है। हाथरस में ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने तंत्र से लड़ाई लड़ कर अपना मुकाम हासिल किया है। आज हम ऐसे लोगों का जिक्र करने जा रहे हैं, जिन्होंने तंत्र से लड़कर अपने संघर्ष से नए आयाम स्थापित किए हैं।

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तंत्र से जंग कर ग्रामीणों को पीने का पानी कराया मुहैया
ग्राम पंचायत महासिंहपुर में खारे पानी की समस्या के खिलाफ इस लड़ाई की शुरुआत सन 2018 से हुई थी। सभी उसी समय में इस समस्या की गंभीरता को देखकर नौकरी छोड़कर गांव में आया था। सभी ग्रामीणों को समझाया। इसके बाद प्रशासन से गुहार लगाई। किसी के न सुनने पर 16 जुलाई 2018 से 22 अगस्त 2018 तक तक सभी ग्रामीणों ने मिलकर अनशन और आमरण अनशन किया। प्रशासन ने वादा करके धोखा दिया। एक बार फिर से कई दिनों तक फिर भूख हड़ताल की।

इसके बाद दिल्ली में राजनाथ सिंह से, लखनऊ में उपमुख्यमंत्री से, बीजेपी मुख्यालय पर जेपी नड्डा से महाराष्ट्र में अन्ना हजारे आदि से मुलाकात करके अपनी समस्या के बारे में बताया, मगर कही से भी कोई समाधान नहीं निकला। इससे परेशान होकर जून 2019 अपने परिवार के साथ अन्न और जल का त्याग किया। और भी पता नहीं क्या क्या करना पड़ा। एक बार मुख्यमंत्री से मुलाकात करने जाने पर लखनऊ में पुलिस भी पकड़ कर ले गई। इसके बाद वर्ष अक्तूबर 2020 में ग्राम पंचायत में पाइप लाइन योजना से पानी देने के लिए मुहर लगी। इसके बाद वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत में पीने के लिए पाइप लाइन डालने का कार्य शुरू हुआ। वर्ष 2022 में ग्रामीणों को पीने का पानी मिल सका।
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तंत्र के ढिलमुल रवैये से लड़ पाई सरकारी नौकरी
कई सरकारी कार्यालयों में अपनी नौकरी पाने के लिए अर्जियां दी, लेकिन सभी कार्यालयों से सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। एक बार निवर्तमान जिलाधिकारी के आदेश के बाद आशा की किरण तो जगी लेकिन फिर वहीं ढाक के तीन पात वाली कहावत साबित हुई। इसके बाद मैंने हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट में तंत्र के रवैये के खिलाफ गुहार लगाई। एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद शिक्षा विभाग में बतौर शिक्षक के पद पर नौकरी हासिल की। -कृष्ण हरि गौड़, शिक्षक।

जनहित याचिका के जरिये तालाब के संरक्षण की प्रक्रिया कराई शुरू
शहर के मुख्य तालाब के संरक्षण के लिए जनहित याचिका फाइल हुई। इसके बाद संबंधित न्यायालय की ओर से नगर पालिका परिषद हाथरस को तालाब के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निर्देश जारी हुए। इसके बाद नगर पालिका प्रशासन की ओर से तालाब के सौंदर्यीकरण का खाका खींचा गया। इस खाका के अनुसार अब कार्य शुरू हो गया है। हालांकि समयानुसार जितना कार्य होना था। उतना कार्य तंत्र के माध्यम से नहीं कराया जा सका है। -हरीश शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता

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