हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने मारपीट कर हाथ तोड़ने के एक आरोपी को दोष सिद्ध माना है। आरोपी को चार वर्ष के कारावास एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगने का निर्णय दिया है।
कोतवाली मुरसान में 09 मई, 1999 को मोहनलाल निवासी नगला शीशम ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके भाई राकेश से गांव के ही राममोहन से मूंज काटने को लेकर विवाद हो गया।
इसमें आरोपी द्वारा गाली गलौज की जा रही थी। जब इसका विरोध किया तो इसने फावड़ा मारकर उसका हाथ तोड़ दिया। झगड़ा देखकर कुछ अन्य लोगों के मौके पर आ गए।
इससे उक्त आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग गया। न्यायालय में दाखिल किए गए आरोप पत्र में पुलिस द्वारा धारा 323,325,307,504 आईपीसी की धाराएं लगाई गई। इनमें से न्यायालय ने सबूतों के आधार पर धारा 323 व 325 में दोष सिद्ध माना है।
इनमें 323 में एक वर्ष के कारावास व एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है, जबकि धारा 325 में चार वर्ष के कारावास एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई हैं। अर्थदंड अदा न करने पर 2 माह के अतिरिक्त कारावास भोगने का निर्णय दिया है। वहीं, दोनों सजाओं के साथ-साथ चलने एवं जेल में बिताई गई अवधि सजा में शामिल करने का निर्णय दिया है।