हाथरस पुलिस ने एक अज्ञात युवक के शव को मुस्लिम समझकर दफना दिया था। मृतक युवक के परिजनों ने दावा किया कि युवक हिंदू था और उसका हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार होना चाहिए। परिजन ने कब्र से शव को निकालने की कही। पुलिस ने डीएनए जांच के लिए भेजा था।
तीन दिन बाद भी डीएनए जांच रिपोर्ट नहीं आने की वजह से यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर जिस हिंदू युवक को मुस्लिम रीति रिवाज से दफनाया गया है, आखिर वह हिंदू था या मुसलमान। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस-प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।
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उल्लेखनीय है कि 23 फरवरी को सहपऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव खेरिया में रेलवे ट्रैक से थोड़ा सा आगे करब में एक युवक का शव बरामद हुआ था। 40 वर्षीय इस मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी तो पुलिस ने इसके शव को पोस्टमार्टम गृह भिजवा दिया था। शिनाख्त की समय सीमा समाप्त होने के बाद पोस्टमार्टम होने पर बताया गया था कि मृतक मुस्लिम है। 26 फरवरी को पुलिस ने कुछ समाजसेवियों के सहयोग से शहर के मुरसान गेट स्थित कब्रिस्तान में उसके शव को दफना दिया था। 29 फरवरी को मृतक के परिवार के लोग उसके शव को खोजते-खोजते सहपऊ कोतवाली पहुंचे थे। फोटो, शरीर पर मिले चिन्ह और कपड़ों के आधार पर इन लोगों ने मृतक की पहचान कर ली थी।
उसकी पहचान 40 वर्षीय अमिता हरिजन पुत्र रामविलास निवासी लामडिंग जिला होजई असम के रूप में हुई थी। मृतक के भाइयों ने बताया कि वह एक मिस्त्री था और उसकी ससुराल दिल्ली में थी। वह 18 फरवरी को घर से ससुराल के लिए निकला था, लेकिन वहां नहीं पहुंचा। जब परिवार के लोगों को यह पता चला कि उनके भाई का शव कब्रिस्तान में दफन है तो उन्होंने पुलिस एवं प्रशासन से शव निकलवाने की गुहार लगाई थी। उनका कहना था कि वह शव को अपने साथ ले जाना चाहते हैं और हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार करेंगे। 1 मार्च को पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से मृतक के दो भाई का डीएनए परीक्षण करने के लिए नमूना लेकर फोरेंसिक जांच हेतु भेजा था। तीन दिन बाद भी डीएनए की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है।
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डीएनए जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है। अभी डीएनए रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही डीएनए की जांच रिपोर्ट आ जाएगी। वैसे ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अशोक कुमार सिंह, एएसपी।