ग्राम पंचायतों की सीआरएस आईडी से फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र जारी के मामले में पुलिस ने बिहार निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी पूर्वी चंपारण का रहने वाला है और वहीं से वह 200 रुपये लेकर जनसेवा केंद्रों के संचालकों को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रहा था। 150 से अधिक जनसेवा केंद्रों के संचालक भी जांच के दायरे में हैं।
गिरफ्तार आरोपी सोनाला पुत्र ठाकुर प्रसाद बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के गांव ढेकहा बालाटोला का रहने वाला है। एसपी निपुण अग्रवाल ने बताया कि कोतवाली सिकंदराराऊ पुलिस और साइबर सेल ने उसे हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास बने फ्लाईओवर के नीचे से गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक लेपटॉप, दो मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड व 16 जन्मप्रमाण पत्रों की प्रतियां बरामद हुई हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि स्वास्थ निदेशालय से आईडी बनाए जाने के साथ ही उसने उसे हैक कर लिया था।
वह 200-200 रुपये में जनसेवा केंद्रों के संचालकों को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाकर उपलब्ध करा देता था। इसके लिए उसने तीन व्हाट्स एप ग्रुप बनाए हुए थे। एक ग्रुप से लगभग 50 जनसेवा केंद्र संचालक जुड़े थे। वह उनसे ऑनलाइन पैसे मंगाकर व्हाट्स एप पर ही प्रमाणपत्र उपलब्ध करा देता। पुलिस ने करीब 150 जनसेवा केंद्रों के संचालकों को भी जांच के दायरे में रखा है। इसके तार प्रदेश में अन्य जिलों में पकड़े गए लोगों से तो नहीं जुड़े हैं, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। साथ ही इसके गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी ली जा रही है।
हाथरस से 47 जिलों के लोगों के बने 2199 प्रमाणपत्र, अमर उजाला ने किया था खुलासा
ब्लॉक हसायन की ग्राम पंचायत सिंचावली सानी के ग्राम पंचायत अधिकारी ईश्वर चंद ने सीआरएस पोर्टल की आईडी प्राप्त होने के बाद उसे खोला तो पाया कि इस आईडी पर 814 जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया। इसके बाद जिले की अन्य ग्राम पंचायतों की आईडी की जांच की गई तो ब्लॉक सादाबाद की ग्राम पंचायत बीजलपुर, रहपुरा और गांव पट्टी बहराम से भी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की बात सामने आई। जिले से छह प्रांतों व करीब 47 जिलों के 2199 जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी ईश्वर चंद ने कोतवाली हसायन में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की जांच शासन स्तर से भी तलब की गई। डीएम ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तीन सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी।
आईडी जनरेट के दौरान पासवर्ड होते थे हल्के
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि सीआरएस पोर्टल पर आईडी बनाए जाने के दौरान पासवर्ड हल्के बनाए जाते हैं, जो कि आसानी से हैक कर लिए जाते हैं। पासवर्ड को हैक करने के बाद यह आईडी अपने ई मेल दर्ज कर ली जाती है। इसके बाद आईडी संचालन के दौरान आसानी से ईमेल पर पासवर्ड प्राप्त हो जाते हैं। आईडी से धड़ल्ले से जन्म प्रमाणपत्र जारी होते रहते हैं। इस युवक ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के लिए गिरोह बना रखा है।
फर्जी तौर पर जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। कुछ नाम अन्य भी संज्ञान में आए हैं। जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
-श्यामवीर सिंह, सीओ सिकंदराराऊ