जिले की ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती के बाद भी ग्रामीण ऑनलाइन योजनाओं के लाभ पाने के लिए शहर की ओर दौड़ रहे हैं। यहां जिले की 399 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक तैनात हैं, लेकिन मॉनीटरिंग के अभाव में पंचायत सहायक न तो पंचायत भवन में बैठ रहे हैं और न ही किसी सार्वजनिक स्थल पर बैठ रहे हैं। इस कारण ग्रामीणों को योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही हैं।
शासन की ओर से जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पंचायत सहायक के पद को सृजित किया गया है। शासन की मंशा थी कि ग्राम पंचायत सहायक के जरिए ग्रामीणों को ऑनलाइन योजनाओं की जानकारी, आवेदन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। ग्रामीणों को अपनी ही ग्राम पंचायत में योजनाओं की पूरी जानकारी मिल सकेगी। इसे लेकर पंचायत भवनों को मिनी सचिवालय के रूप में तैयार कर संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन तैयार भी हो गए, वहां उपकरण मौजूद नहीं हैैं और पंचायत सहायक पंचायत भवनों में भी नहीं बैठ रहे हैं। शासन ने यह भी निर्देश दिए थे कि जिन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ है, उन ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक सरकारी स्कूल व सार्वजनिक स्थल पर बैठकर ग्रामीणों को ऑनलाइन आने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे। पंचायती राज विभाग व प्रशासन की ओर से मॉनीटरिंग न हो पाने के कारण ग्राम पंचायत सहायक न तो पंचायत भवन में बैठ रहे हैं और न ही किसी सार्वजनिक स्थल पर बैठ रहे हैं। जिले में 399 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती हो चुकी है। जिले की 64 ग्राम पंचायतों में अभी पंचायत सहायक के पद रिक्त हैं। हैरानी की बात यह है कि 399 ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों पर प्रति माह सरकार 23.94 लाख रुपये खर्च करती है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी के लिए कार्यालयों व शहर की ओर से भागना पड़ रहा है।
हमारी ग्राम पंचायत में पहले पंचायत सहायक की नियुक्ति हुई थी, लेकिन पंचायत सहायक इस्तीफा देकर चली गई। अभी तक दूसरे पंचायत सहायक की नियुक्ति नहीं हुई है। योजनाओं की जानकारी लेने के लिए शहर में जाना पड़ता है।
दुजेंद्र सिंह, खोड़ा।
ग्राम पंचायत में तैनात पंचायत सहायक केवल बैठकों में देखने को मिलता है। पंचायत भवन अपूर्ण पड़ा हुआ है। ग्रामीणों को पंचायत सहायक की तैनाती से कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को योजनाओं के आवेदन के लिए शहर ही जाना पड़ता है।
पवन सिसौदिया, गुतहरा
ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों की मॉनीटरिंग के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। ग्राम पंचायत सहायक पंचायत भवन या सार्वजनिक स्थल पर बैठकर ग्रामीणों को योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे। जल्द ही सभी पंचायत सहायकों के साथ बैठक की जाएगी।
एके मिश्र, प्रभारी डीपीआरओ