भारत की महिला क्रिकेट टी-20 की कप्तान और पंजाब पुलिस में खेल कोटे से डीएसपी हरमनप्रीत कौर चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (सीसीएसयू) के नाम की फर्जी डिग्री लगाकर फंस गई हैं। मामले में पंजाब पुलिस ने यूनिवर्सिटी के विजिलेंस विभाग से गोपनीय जांच कराई थी। विजिलेंस विभाग ने मार्कशीट का कोई रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही थी।
सीसीएसयू के विजिलेंस विभाग में हर महीने देश के तमाम राज्यों से हजारों मार्कशीट और डिग्रियां सत्यापन के लिए आती हैं। इनकी जांच रिकॉर्ड में देखकर की जाती है।
प्राइवेट कंपनियों की तरफ से कराए जाने वाले सत्यापन में हर महीने चार-पांच फर्जी मार्कशीट-डिग्रियां पकड़ी ही जाती हैं। पिछले कुछ महीने से तो वेरीफिकेशन के लिए हर महीने दस हजार तक मार्कशीट आ रही हैं। अकेले दिल्ली सरकार ने ही 15 सालों से नौकरी कर रहे शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कराने के आदेश दिए हैं। कैंपस विजिलेंस विभाग के मुताबिक पंजाब पुलिस यहां आई थी।
जांच में हरमनप्रीत की डिग्री का रिकॉर्ड नहीं मिला। पंजाब पुलिस में खेल कोटे से डीएसपी बनने वाली हरमनप्रीत को पंजाब के सीएम सम्मानित कर चुके हैं। हरमनप्रीत ने कई मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है।
दर्ज हो सकता है धोखाधड़ी का केस
अंतिम जांच रिपोर्ट में डिग्री के फर्जी होने की पुष्टि हो जाने पर हरमनप्रीत कौर के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी का केस भी दर्ज किया जा सकता है।
पंजाब पुलिस हरमनप्रीत कौर के नौकरी के लिए वेस्टर्न रेलवे में जमा कराए शैक्षणिक दस्तावेज की भी जांच कर सकती है। इससे पता लग सकेगा कि करीब तीन वर्ष पूर्व भी हरमनप्रीत कौर की तरफ से रेलवे को जमा कराई गई डिग्री की जांच कराई गई थी या नहीं।
यदि जांच कराई गई थी तो फिर उसका रजिस्ट्रेशन नंबर अब यूनिवर्सिटी के पास क्यों नहीं है। अब हरमनप्रीत पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी या फिर उसे केवल पुलिस विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, फिलहाल पंजाब सरकार इस संबंध में स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।