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मुफ्त पोषाहार को तैयार, मनरेगा में काम से इनकार

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हरदोई। कुपोषण की बड़ी वजह आर्थिक तंगी भी मानी जाती है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावकों को आय बढ़ाने के विभिन्न मौके दिए जाते हैं। मनरेगा के तहत मजदूरी भी दी जाती है। लेकिन परेशानी यह है कि मुफ्त पोषाहार लेने वाले बच्चों के अभिभावक रोजगार से इनकार कर रहे हैं।
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बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने की कवायद की जाती है। जब कुपोषण के कारणों पर चर्चा होती है, तो यह भी सामने आता है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण माता पिता अपने बच्चों पर बहुत अधिक ध्यान नहीं दे पाते। इस बिंदु के सामने आने पर शासन ने ऐसे अभिभावकों को रोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए। कहा कि ऐसे बच्चों के पिता को मनरेगा के तहत जॉबकार्ड दिया जाए और एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराएं।
इसके तहत बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की सूची पूरे ब्योरे के साथ मनरेगा सेल को सौंप दी। ग्राम सचिवों और रोजगार सेवकों ने गांव-गांव जाकर संबंधित बच्चों के पिता से संपर्क किया, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने जॉब कार्ड बनवाने और मनरेगा में मजदूरी करने से इनकार कर दिया।
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टड़ियावां विकास खंड के ग्राम नानकगंज ग्रंट में रहने वाली राखी कुपोषित है। ग्राम्य विकास विभाग के कर्मचारियों ने राखी के पिता अमित से संपर्क कर उन्हें मनरेगा जॉबकार्ड बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन अमित ने इच्छुक न होने की बात कह दी।
मल्लावां विकास खंड के ग्राम शाहपुर गंगा निवास प्रिंस भी कुपोषित है। उसके पिता गिरजा प्रसाद से ग्राम सचिव और रोजगार सेवक ने संपर्क किया। मनरेगा के तहत कार्य करने के लिए जॉबकार्ड बनवाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन गिरिजा प्रसाद ने इनकार कर दिया।
हरियावां विकास खंड के ग्राम खेरिया में बरखेरिया केंद्र पर पंजीकृत शीला कुपोषित है। उसके पिता सालिक से ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने संपर्क किया और मनरेगा के तहत कार्य उपलब्ध कराने का प्रस्ताव देकर जॉब कार्ड बनवाने को कहा। सालिक ने जॉबकार्ड बनवाने का इच्छुक न होने की बात कह दी।
डीपीओ की सुनिए
जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्धि मिश्रा ने बताया कि कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की सूची समय-समय पर ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को भेजी जाती है। हर माह इसकी समीक्षा भी होती है। बच्चों के अभिभावकों को मनरेगा से रोजगार दिलाने की जिम्मेदारी मनरेगा उपायुक्त की है।
मनरेगा उपायुक्त बोले
मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल का कहना है कि सूची बाल विकास पुष्टाहार विभाग से मिली है। ग्राम सचिव और रोजगार सेवक संपर्क भी करते हैं। जो लोग इच्छुक होते हैं उनके जॉबकार्ड बनाकर कार्य उपलब्ध कराया जाता है। अगर कोई जॉबकार्ड नहीं बनवाता और मनरेगा से कार्य नहीं करना चाहता तो उस पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।
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