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अस्पताल में मरीजों को बेड के लिए करना पड़ा तीन घंटे इंतजार

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हरदोई। संक्रामक रोगों के साथ ही वायरल, मलेरिया और डेंगू लगातार बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि जिला चिकित्सालय में मरीजों को भर्ती कराने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है। अस्पताल के सर्जिकल वार्ड को छोड़ दें तो लगभग सभी वार्डों में बेड फुल हैं। सोमवार को आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में भर्ती होने के लिए मरीजों को तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
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जिला अस्पताल में इन दिनों सात वार्ड संचालित हैं। इन वार्डों में 209 बेड पड़े हैं। इन दिनों संक्रामक बीमारियों चरम पर हैं। जिसके चलते जिला अस्पताल में रोजाना 50-60 मरीज भर्ती हो रहे हैं। यूं तो जिला चिकित्सालय में 209 बेड विभिन्न वार्डों में हैं, लेकिन कई वार्ड ऐसे हैं जहां मरीज भर्ती नहीं होते। अन्य वार्डों में सोमवार की सुबह तक 101 मरीज भर्ती थे।
इधर, सोमवार की सुबह आकस्मिक कक्ष में मरीजों की भीड़ उमड़ी। चिकित्सक ने मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरु किया। वार्डों में मरीजों को भेजने की बारी आने पर कर्मचारियों ने बेड खाली न होने की बात कहकर हाथ खड़े कर लिए।
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जिससे सुबह 10 बजे भर्ती मरीजों को बेड के लिए तीन घंटे इंतजार करना पड़ा। वार्डों में भर्ती मरीजों की छुट्टी होने पर एक-एक कर मरीज भर्ती किए गए। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि संक्रामक बीमारियों से ग्रसित मरीज ज्यादा आ रहे हैं। जिसके कारण मरीजों को बेड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन जगह मिलने पर मरीजों तत्काल वार्डों में शिफ्ट किया जा रहा।
संक्रामक बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों अंचलों में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) केवल रेफर सेंटर बने है। सीएचसी-पीएचसी में मरीज भर्ती न होने से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
हरपालपुर के मिरगांवा गांव निवासी रामनाथ (60) ने बताया कि उसे एक सप्ताह से बुखार आ रहा है। सोमवार की सुबह 10 बजे परिजन उसे जिला अस्पताल के आकस्मिक कक्ष लाए। जहां पर चिकित्सक ने भर्ती कर लिया। लेकिन कर्मचारियों ने बेड खाली न होने की बात कही। जिसके चलते तीन घंटे बेड के लिए इंतजार करना पड़ा।
सुरसा ब्लॉक के पुरवा निवासी निवासी रामसुखी (40) को डायरिया हो गया। सोमवार की सुबह तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। 11 बजे आकस्मिक कक्ष में चिकित्सक ने उसे भर्ती कर दिया गया। परिजनों ने बताया कि वार्डों में बेड खाली न होने के चलते रामसुखी को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
पचदेवरा के ग्राम धानीनगला निवासी सुनीता (30) बुखार से पीड़ित है। सोमवार सुबह करीब 10 बजे परिजन उसे जिला अस्पताल के आकस्मिक कक्ष लाए। परिजनों ने बताया कि चिकित्सक ने स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू किया। परिजनों ने स्टॉफ से बेड दिलाने के लिए गुहार लगाई। स्टॉफ ने इंतजार करने के बाद बेड दिलाने की बात कही। दोपहर बाद नंबर आने पर उसे भर्ती किराया जा सका।
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