बावन(हरदोई)। लोनार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यास अनूप ठाकुर महाराज ने गोवर्धन पूजा एवं महारास की कथा सुनाई। कहा कि गोवर्धन पूजा परमात्मा में आस्था का प्रतीक है।
कहा कि भगवान ने कर्म की प्रधानता बताने के साथ ही देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए एवं अपने त्रेता वाले वचन को पूरा करने के लिए गिरिराज का पूजन कराया।
जिस समय सेतु के लिए सब बानर साथी पर्वत ला रहे थे, सेतु का कार्य पूर्ण होने पर यह घोषणा हो गई, जो वानर साथी जिस पर्वत को ला रहा, वहीं पर रख दें। हनुमान जी गोवर्धन पर्वत को वृंदावन तक ला पाए। घोषणा स्वरूप गोवर्धन को वृंदावन में रखा।
गोवर्धन दुखी हुआ, राम जी ने वरदान दिया, हम द्वापर में आपका अपने हाथों से पूजन एवं भोग लगाएंगे। ठाकुर महाराज ने कहा कि वही वचन पूरा करने के लिए सर्वज्ञ होते हुए भी दीपावली के दूसरे दिन तमाम पकवान, मेवा-मिष्ठान्न बनते देख अबोध की तरह नंद बाबा से पूछा, पिताजी यह क्या हो रहा है, इसका क्या उद्देश्य है।
नंद बाबा द्वारा इंद्रयोग की तैयारी सुनकर भगवान ने कहा कर्म से ही शत्रु, मित्र, हानि-लाभ, जीवन-मरण आदि का निर्धारण होता है। अत: कर्म ही श्रेष्ठ है।
इस मौके पर सोनू सिंह राठौड़, आयोजक मोनू सिंह राठौड़, बलराम सिंह राठौड़, सुखपाल सिंह राठौड़, शेखर सिंह राठौड़, अनूप दुबे, सूरज त्रिवेदी श्याम, नीलेश, रामराज आदि मौजूद रहे।
धर्म की हानि होने पर प्रभु लेते हैं अवतार
मल्लावां के श्यामपुर में श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को भक्त प्रहलाद क़ी लीला का वर्णन किया गया। संत राजीव लोचन दास महाराज ने बताया कि हिरण्याकश्यप ईश्वर आदि को नहीं मानता था। किसी के यज्ञ जप को विध्वंस कर देता था। उसी के यहां उसके पुत्र के रूप में भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ।
यह आभास भी कराया कि ईश्वर सब जगह व्याप्त है। इसकी भक्ति द्वारा कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है। कहा भगवान कृष्ण या राम या कोई महान शक्तियां पृथ्वी पर अवतार लेती हैं।
जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ने लगता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
जीवन नैया पार लगाने वाला सद्गुरु
बेनीगंज के मलेहरा के बरगद तिराहे पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को व्यास रामलखन शास्त्री ने कहा कि कि सत्संग एक ऐसा अनमोल खजाना है, जिसको सुनने से ज्ञान प्राप्त होता है।
जीवन भर सत्संग सुनता रहा, जब तक समझा नहीं, भजन भी नहीं किया, तब तक कुछ भी नहीं। सेवा सब का मूल है, सेवा से ही सत्संग समझ में आता है। सेवा से भजन में ध्यान लगता है।
जो जितनी सेवा करता है, जिसका जैसा भाव है, उसको वैसा ही फल मिलता है। आप लोगों ने पढ़ा होगा की धौम्य ऋषि के शिष्यों ने गुरु की कैसी सेवा की, एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य की आज्ञा पाते ही अपना अंगूठा काट दिया और जितने भी भक्त हुए हैं सभी ने गुरु की सेवा की। इस मौके पर मुकेश, अनुज, अनूप, सुरेश, बांके, दिलीप, इंद्रपाल आदि लोग मौजूद रहे।
आर्य समाज का धर्म रक्षा सम्मेलन दो को
सवायजपुर के कस्बा स्थित आर्य समाज मंदिर में दो अप्रैल को जिला आर्य समाज प्रतिनिधि सभा हरदोई के तत्वावधान में यज्ञ एवं धर्म रक्षा सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
सभा के प्रधान आरेंद्र पांडे ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता देवेंद्र पाल वर्मा प्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश/ उत्तराखंड करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक भाजपा माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू उपस्थित रहेंगे।