हरदोई। सुनासीरनाथ मंदिर में 16वीं शताब्दी में औरंगजेब के आक्रमण के निशान मौजूद हैं। बताया जाता है कि मुगल सेना ने शिवलिंग पर आरा चलवाया था, जिसके निशान अब भी शिवलिंग पर मौजूद हैं। शिवलिंग से निकली बर्र और ततैया के हमलों से मुगल सेना को भागना पड़ा था।
सावन माह में भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत से धरती पर आते हैं। मान्यता है कि सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना से सभी मनोरथ पूरे होते हैं। सुनासीरनाथ मंदिर के संबंध में मान्यता है कि देवराज इंद्र ने विधिवत पूजन-अर्चन से शिवलिंग की स्थापना की थी। पुजारी आचार्य मंगल प्रसाद मिश्रा ने बताया कि शिवलिंग का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है। भगवान इंद्र के नाम से ही मंदिर का नाम सुनासीर पड़ा है।
16वीं शताब्दी में जब मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर की ख्याति सुनी तो आक्रमण कर दिया। मंदिर से सोना-चांदी और खजाना लूट लिया। शिवलिंग को भी नष्ट कराने का प्रयास किया। मुगल सेना ने शिवलिंग पर आरा चलाया। शिवलिंग से निकली ततैया और बर्र ने मुगल सेना पर हमला कर दिया। इससे मुगल सैनिकों में खलबली मच गई और जान बचाने के लाले पड़ गए थे। मुगल सेना मंदिर से भागी और बर्र और ततैया ने शुक्लापुर गांव तक सेना का पीछा किया था। वहां पर एक कुएं में मिलने वाले नर कंकाल व हड्डियां उसी का अवशेष मानी जाती हैं।
मुगल शासक ने मंदिर को तोड़फोड़ दिया था। मंदिर को क्षेत्र के लोगों ने दोबारा से सही कराया। पतली ईंटों से बने मंदिर को अब संगमरमर के पत्थर लगाकर सुंदर बनाया गया है। मंदिर के द्वार पर भगवान शिव की विशाल मूर्ति है। मंदिर के दाहिने ओर भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति है।