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13 घंटे 47 मिनट का होगा पहला रोजा

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पिहानी। रहमत और बरकत के महीने रमजान शरीफ की आमद को लेकर मस्जिद और घरों में तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस बार रमजान रविवार या सोमवार से (चंद्र दर्शन के अनुसार) शुरू हो जाएंगे। पहला रोजा 13 घंटे 47 मिनट का होगा।
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रमजान से ठीक पहले जुमे की नमाज पर मस्जिदों से उलेमा-ए-कराम ने रोजा और तरावीह से संबंधित मसायल बताए।
ईदगाह के इमाम मौलाना उसमान गनी मजाहिरी ने शुक्रवार को मस्जिद इस्लामगंज में जुमा नमाज से पहले तकरीर में कहा कि रमजान गरीबों से हमदर्दी का पैगाम देता है।
कहा कि रोजा हमें गरीबों की भूख का अहसास कराता है। रोजेदार के लिए अल्लाह की तरफ से तीन बड़ी खुशियां हैं। एक इफ्तार के समय, दूसरी ईद और तीसरी अल्लाह से मुलाकात की खुशी।
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मैदान-ए-महशर में जब सवा नजे पर होगा। हर तरफ अफरातफरी का माहौल होगा। ऐसे में सबको अपनी-अपनी पड़ी होगी। बाप बेटे को और बेटा बाप को तक को नहीं पहचानेगा। ऐसे में कुछ लोग अर्श के साये में खा पी रहे होंगे। ये रोजेदार ही होंगे।
मौलाना ने समझाया कि रमजान गरीबों से हमदर्दी का पैगाम देता है। सदकतुल फित्र की व्यवस्था इसी का हिस्सा है। इस्लाम ने जकात का निजाम बना दिया, ताकि अमीर लोग गरीबों को अपने माल का एक निश्चित अंश दान करें।
हैसियत के बावजूद जो लोग जकात अदा नहीं करते, बड़े गुनहगार हैं। मौलाना ने कहा कि रोजे का मतलब केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं है, बल्कि रोजा रखने का मतलब यह है कि हमारी जुबान, हमारा दिल और हमारा मन भी रोजे की हालत में हो।
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हालते रोजा के दौरान गुस्से पर नियंत्रण कर सब्र और शुक्र बजा लाने वाले लोग ही सच्चे रोजेदार हैं।
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