हरदोई। श्रीराम लीला मेला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित मुशायरे में शायरों एवं गीतकारों ने एक से बढ़कर एक गीत गजल और शेर पढ़कर समां बांध दिया।
शुक्रवार की रात में हुए कार्यक्रम में देर रात तक श्रोता तालियों की गड़गड़ाहट के साथ शायरों का उत्साह बढ़ाते रहे। शायरों ने भी आयोजन की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के श्रोताओं की मोहब्बत सर आंखों पर है।
बड़ी खुशी मिलती है, जब इतना चाहने वाले श्रोता सामने हो तो गीत गजल शेर पढ़ने का आनंद बेशुमार हो जाता है। गीत, गजलों और शेरों के माध्यम से शायरा शाइस्ता सना ने कार्यक्रम में समां बांधा।
लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने पढ़ा कि वादा करती हूं, कुछ भी हो जाए, मैं सदा गम में मुस्कुराऊंगी, तुम मुझे छोड़ कर जाओगे, हाय अल्ला मैं मर न जाऊंगी।
हसीब सोज ने सुनाया, तिरी मदद का यहां तक हिसाब दे देना, चराग लेके मुझे आफताब दे देना तो लोग वाह वाह कह उठे। बिलाल सहारनपुरी ने सुनाया कि पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिंदु मुसलमान हुआ करता था।
उन्होंने कई शेर पढ़कर श्रोताओं को तालियां बजाने एवं वाह वाह कहने पर मजबूूर कर दिया।
आदिल रशीद दिल्ली ने पढ़ा कि रोटी की फ्रिक ने उसे रिक्शा थमा दिया, भटका बहुत वो हाथ में डिग्री लिए हुए, दिखाई कुछ नहीं देता, मगर अल्लाह की कुुदरत कि बच्चा सांस की खुशबू से अम्मी ढूंढ लेता है।
कलीम समर अलीगढ सहित तमाम शायरों की प्रस्तुति से श्रोताओं चहकते रहे।
इस मौके पर पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष राम प्रकाश शुक्ला, मनमन श्रीवास्तव, रंजना सिंह, डॉ. सौरभ दयाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। रामलीला मेला कमेटी प्रबंधन ने सभी का शायरों का स्वागत किया और आभार जताया।