फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

20 बॉक्स से शुरू कारोबार 400 बॉक्स तक पहुंचा

विज्ञापन
फोटो-18- बॉक्स में लगे छत्ते में शहद को देखते किसान रवींद्र सिंह। संवाद - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
विवेक सिंह
विज्ञापन

हरदोई। परंपरागत खेती से हटकर शुरू किए मधुमक्खी पालन ने भरखनी के रतनपुर निवासी रवींद्र का जीवन ही बदल दिया। कभी 20 बॉक्स के साथ शुरू हुआ मधुमक्खी पालन का यह सफर अब 400 बॉक्स तक जा पहुंच गया है।
शहद उत्पादन के लिए उनकी टीम हरदोई ही नहीं उत्तराखंड, बिहार और राजस्थान में भी बॉक्स लगा रही है। अब उनकी पहचान शहद किंग के रूप में हो गई है।
भरखनी के ग्राम रतनपुर निवासी रवींद्र कुमार परास्नातक हैं। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा है। रवींद्र को लगभग 5 एकड़ पैतृक भूमि मिली थी, जिस पर वे गेहूं, धान और गन्ने की खेती करते हैं। कुछ अलग करने की चाहत उन्हें 2010 में कृषि विज्ञान केंद्र ले गई।
विज्ञापन

कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम ने उन्हें मधुमक्खी पालन की सलाह दी। उनके मार्गदर्शन में वर्ष 2011 में रवींद्र ने 20 बॉक्स के साथ मधुमक्खी पालन शुरू किया। शुरुआत में कुछ लोगों ने उनके काम के चयन पर सवाल उठाए, लेकिन इन सब की चिंता न कर रवींद्र ने अपना काम जारी रखा। उनकी मेहनत रंग लाई, साल दर साल कारोबार बढ़ता गया।
अब उनका कारोबार 400 बॉक्स तक पहुंच गया। काम बढ़ा तो रवींद्र को इसे संभालने के लिए लोग लगाने पड़े। गांव के कुछ लोगों की मदद लेने के साथ ही रवींद्र ने रामपुर के तीन युवकों को प्रशिक्षित किया। अब उन्हीं के साथ मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन का काम संभाल रहे हैं।
रवींद्र का कहना है कि मधुमक्खी पालन ने उन्हें न सिर्फ आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि शहद उत्पादक के रूप में पहचान भी दिलाई है। उनकी चाहत है कि शहद की पैकेजिंग कर अपने ब्रांड के नाम से शहद का कारोबार करें। संवाद
उत्तराखंड, बिहार और राजस्थान में लगाए बॉक्स
हरदोई। मधुमक्खी पालक व शहद उत्पादक रवींद्र सिंह ने बताया कि शहद का उत्पादन नवंबर से मार्च तक होता है। शुरुआत में गांव व आस पास ही बॉक्स लगाकर काम शुरू किया, लेकिन बॉक्स बढ़ने पर अच्छे शहद के लिए पहले आसपास के जनपदों व इसके बाद मुजफ्फरपुर बिहार, उत्तराखंड के नैनीताल व रामनगर तक में बॉक्स लगाए हैं, जिनका परिणाम काफी अच्छा आया। बताया कि इस समय उन्होंने लगभग 350 बॉक्स राजस्थान के भरतपुर में लगा रखे हैं। मार्च के अंत तक बॉक्स से शहद निकाला जाएगा।
विज्ञापन

प्रेरणा मिली तो और लोग भी जुड़े
रवींद्र सिंह ने जब मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में सफलता पाई तो उनके परिचितों और क्षेत्र के लोगों को भी मधुमक्खी पालन की प्रेरणा मिली। लोगों ने संपर्क किया तो रवींद्र ने सभी का मार्गदर्शन कर पालन की दिशा में सहयोग भी किया। रवींद्र ने बताया कि इस समय क्षेत्र के ग्राम कुंआडाड़ी समेत गांव के तीन लोग और जनपद के कई लोग सफलतापूर्वक मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें