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ंद पड़ी नौनिहालों की दक्षता को विकसित करेगा रेमेडियल पैकेज

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फोटो-15-शहर के एक परिषदीय स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। फाइल - फोटो : HARDOI
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कोरोना काल में हर क्षेत्र में कामकाज पटरी से उतर से गए हैं। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित है। स्कूल बंद होने से ज्यादातर नौनिहालों की पढ़ाई चौपट है। शिक्षा के गिरते स्तर को उठाने के लिए उच्च शिक्षा की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग भी रेमेडियल पैकेज की शुरुआत करेगा। स्कूल खुलने पर कमजोर बच्चों की 100 दिन की पढ़ाई की योजना विभाग बना रहा है।
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कोरोना काल में जिले के सभी करीब 4000 परिषदीय विद्यालयों में पहले पहल तो ताला ही पड़ा रहा। विद्यालय खुले तो सिर्फ शिक्षकों को ही विद्यालय जाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद बच्चों की शिक्षा के लिए ऑनलाइन व्हाट्स ग्रुप, दीक्षा ऐप पर पढ़ाई, रीड अलांग आदि।
इन सब कवायदों के बाद भी करीब पांच लाख बच्चों में दो-ढाई हजार बच्चे ही ऑनलाइन पढ़ाई कर सके। इस स्थिति को देखते हुए शासन ने बच्चों की पढ़ाई के लिए तीन श्रेणियों में बांटकर उन्हें 100 दिनों की विशेष रेमेडियल क्लासेज देने का निर्णय लिया है।
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जिला स्तर पर इन कक्षाओं को संचालित करने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गईं हैं। बीएसए हेमंत राव ने बताया कि यह पहली बार होगा कि जब परिषदीय विद्यालयों में उपचारात्मक शिक्षण का प्रयोग हो रहा है। इससे पहले उच्च शिक्षा में इसका प्रयोग किया जाता रहा है।
शासन के निर्देश पर जिले में इसकी तैयारियों के लिए दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। 100 दिनों का रेमेडियल पैकेज तैयार किया जा रहा है।
रेमेडियल क्लासेज से पहले योजनाबद्ध तरीके से छात्र छात्राओं के स्तर का आंकलन किया जाएगा। छात्रों को तीन समूहों में बांटा जाएगा।
पहले समूह में वह छात्र होंगे जो अपनी वास्तविक दक्षताओं के अनुरूप चीजों को समझ रहे हैं। दूसरे ग्रुप में वो छात्र रखे जाएंगे जो अपने स्तर की चीजों को थोड़ा बहुत जान रहे हैं। तीसरी श्रेणी में वह चिह्नित किए जाएंगे जो अपने कक्षा स्तर के विषय में कुछ भी नहीं जानते।
स्टेट ग्रुप रिसोर्स सदस्य एसआरजी राधेश्याम दीक्षित का कहना है कि ग्रुप तैयार होने के बाद शिक्षण की व्यापक योजना तैयार की जाएगी। प्रत्येक विषय में तीन समूह ही बनेंगे। जिस विषय का शिक्षण होगा। उस समय शिक्षकों के सामने तीन समूह कार्य कर रहे होंगे। मगर प्रत्येक विषय के शिक्षण के समय तीनों समूह के बच्चे अलग-अलग हो सकते हैं।
बीएसए हेमंत राव ने बताया कि उपचारात्मक शिक्षण में बताया जाता है कि बच्चों को आपस में चर्चा करने की छूट प्रदान की जाए। इससे भी वह काफी कुछ सीखते हैं और उनके अंदर कुछ पूछने व कुछ सीखने की क्षमता का संवर्धन होता है। इस 100 दिनों की क्लासेज में भी कुछ ऐसे ही प्रयास होंगे और उनके शिक्षा के स्तर को उठाने के पूरे प्रयास होंगे।
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