कछौना। पारा चढ़ने के साथ ही तालाबों में पानी सूख गया है। पशु-पक्षी प्यासे हैं।
विकास खंड कछौना में 41 ग्राम पंचायतें हैं। प्रति ग्राम पंचायत में औसतन पांच से छह तालाब हैं। इनमें से कुछ मनरेगा के बाकी परंपरागत तालाब हैं। इन तालाबों का उद्देश्य जलस्तर बढ़ाना है। ब्लॉक के कई गांवों में ऐसे भी तालाब हैं, जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं। इनमें से कई का अस्तित्व खत्म हो चुका है। वहीं जो तालाब मनरेगा से खोदवाए गए हैं, उनमें पानी नहीं बचा है।
शासन के निर्देशानुसार नहरों और माइनर से ही तालाबों को भरवा सकते हैं। खास बात यह है कि कई के तालाबों तक नहर व माइनर से पानी पहुंचाने की सुविधा ही नहीं है। ग्राम पंचायत गाजू, महरी, मरेउरा, मतुआ समेत अन्य गांवों के तालाब सूखे पड़े हैं। डीपीआरओ गिरीश चंद्र ने बताया कि सूखे तालाबों को भरवाने के संबंध में शासन से अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। नहर व माइनर आदि से तालाबों को भरवाया जा सकता है।