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न एक्सरे, न अट्रासाउंड, कैसे लड़ेंगे ओमिक्रॉन से जंग

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सवायजपुर। ओमिक्रॉन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चल रही तैयारियों की पोल तहसील मुख्यायल की गौरखेड़ा सीएचसी की दुर्दशा खोल देती है। यहां न तो एक्सरे की सुविधा है और न ही अल्ट्रासाउंड की। एक संविदा पर तैनात नर्स के सहारे ही प्रसव की व्यवस्था है। ऐसे में कोरोना की तीसरी संभावित लहर संसाधनों के अभाव में कैसे रुकेगी, ये जिम्मेदारों के सामने एक बड़ा सवाल है।
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सीएचसी पर हड्डी रोग विशेषज्ञ व स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अमर उजाला की टीम गुरुवार को सीएचसी पहुुंची तो ओपीडी में अधीक्षक डॉ. पराग कुमार मरीजों को देख रहे थे। एक्स रे टेक्नीशियन सुरेंद्र कुमार मरीजों के नए पर्चे बना रहे थे। बताया गया कि प्रसूति विभाग में एकमात्र संविदा पर तैनात नर्स हैं, जो कि छह माह से काम कर रही हैं। यहां डॉक्टर व कर्मचारियों को मिलाकर 13 लोगों का स्टाफ है लेकिन सिर्फ तीन ही लोग दिखे। यहां रोजाना लगभग 150 से 200 मरीज आते हैं। ज्यादातर वायरल बुखार, सर्दी, जुकाम जैसी बीमारियों का ही इलाज किया जाता है। गंभीर बीमार लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
सवायजपुर। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीएचसी सिर्फ नाम की है यहां पर इलाज तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसा ही मिलता है। यहां पर न तो एक्सरे मशीन है और न ही अल्ट्रासाउंड मशीन। ऐसे में अगर कोई चोटिल होकर भी आ जाता है तो उसका एक्सरे होना मुश्किल हो जाता है।
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सवायजपुर। सीएचसी अधीक्षक डॉ. पराग कुमार ने बताया कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए प्रधानमंत्री योजना से पांच कंटेनर मिल चुके हैं। वार्डों में भी तैयारियां की जा रहीं हैं। क्षेत्रीय विधायक ने भी अन्य जरूरी सामान की स्वीकृति के लिए कहा है पर अभी तक उपलब्ध नहीं हुआ है। उनका कहना है कि कुछ जांचों के लिए मरीजों को बाहर भेजना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बाकी उनके यहां कुल 13 का नियमित व सात संविदा कर्मी हैं। न आने वालों के खिलाफ सीएमओ से शिकायत की है।
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