फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: बारिश में टपक रही पुरानी ओपीडी की छत, जर्जर इमारत बनी खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की पुरानी ओपीडी भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। बरसात में इमारत की छत से जगह-जगह पानी टपकता है। इससे भवन में हादसे का खतरा बना रहता है। खास बात यह है कि इमारत की मरम्मत के लिए महानिदेशक की ओर से आदेश दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि, इमारत में कुछ चिकित्सा विभागों की ओपीडी और सीएमएस कार्यालय भी मौजूद है।
विज्ञापन


पुरानी ओपीडी की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, मगर इसी खस्ताहाल ढांचे के नीचे रोजाना सैकड़ों जिंदगी और मौत से जूझते मरीज पहुंचते हैं। भवन के जर्जर कमरों में आज भी डॉक्टर मरीजों का परीक्षण कर रहे हैं। यही नहीं, टीबी जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सैंपल देने वाले मरीज और कुत्ते के काटने के बाद एंटीरेबीज का टीका लगवाने वाले लोग भी इसी टपकती छत के नीचे कतार में खड़े रहने को मजबूर हैं। बारिश होते ही कमरों से लेकर गलियारों के फर्श पर पानी फैल जाता है, जिससे मरीजों और तीमारदारों के फिसलकर चोटिल होने का डर लगातार बना रहता है। ताज्जुब की बात यह है कि चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक की ओर से जुलाई 2025 में मरम्मत के स्पष्ट आदेश जारी करते हुए। बजट भी दिया गया है लेकिन 14 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मरम्मत का काम शुरू नहीं कराया गया है।
सबसे हैरान करने वाली बात एक यह भी है कि आईपीडी की नई इमारत में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत कई चिकित्सा अधिकारियों के कार्यालय भी आवंटित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी पुरानी और खतरनाक हो चुकी ओपीडी से अपना दफ्तर नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने को तैयार नहीं हैं। अफसरों के इसी हीलाहवाली के चलते निचले कर्मचारियों व मरीजों को रोजाना अपनी जान हथेली पर रखकर इस इमारत में कदम रखना पड़ता है।
विज्ञापन




पुरानी ओपीडी की इमारत की मरम्मत कराई जानी है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार हो गया है। कक्ष स्थानांतरित करवाकर जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें