हरदोई। संसद में सरकार ने भले ही ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत न होने की बात कही हो, लेकिन हकीकत इससे उलट है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन के लिए छटपटाहट सिर्फ आम लोगों को ही नहीं हुई बल्कि कई जनप्रतिनिधियों ने भी इसे महसूस किया। यह छटपटाहट विभिन्न जनप्रतिनिधियों के पत्रों के रूप में उसी वक्त सामने आ गई थी। न सिर्फ पत्र बल्कि कुछ वीडियो जारी करके जनप्रतिनिधियों ने ऑक्सीजन की कमी के कारण उपजे हालातों पर अपनी चिंता जाहिर की थी। यहां प्रकाशित जनप्रतिनिधियों के पत्रों को पढ़िए और खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि संसद में दिया गया सरकार का बयान सटीक है या आपके चुने हुए प्रतिनिधियों का दर्द जो उन्हें लगातार सताता रहा।
26 अप्रैल को सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा था। सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक में यह पत्र सुर्खियों में था। इस भावनात्मक पत्र में विधायक ने लिखा था कि ऑक्सीजन की कमी से बहुत सारे लोग असमय काल के गाल में समा रहे हैं।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से हाहाकार मचा था और लोग जनप्रतिनिधियों से मदद मांग रहे थे। उन हालातों में बेबस महसूस कर रहीं शाहाबाद विधायक रजनी तिवारी ने संजीदगी दिखाई। 30 अप्रैल को लिखे गए उनके पत्र को पढ़कर हालात का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉ. अशोक वाजपेयी ने पिहानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को गोद लिया है। गोद लिए जाने से पहले ही उन्होंने लखनऊ के डीएम को एक पत्र भेजा। यहां प्रकाशित उनके पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि मरीजों को ऑक्सीजन की दिक्कत हो रही है।
संडीला विधायक ने तो बेटा तक खोया
संडीला से भाजपा विधायक राज कुमार अग्रवाल के होनहार पुत्र आशीष अग्रवाल की मौत 26 अप्रैल को लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में हो गई थी। घटना के बाद विधायक ने लखनऊ में पुलिस अफसरों को तहरीर देकर अस्पताल पर उपचार में लापरवाही करने का आरोप लगाया था। सुर्खियों में रहे विधायक के बयान में स्पष्ट कहा गया था कि अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गई थी और उनके पास उपलब्ध ऑक्सीजन अस्पताल ने लगाने नहीं दी। घटना को लगभग तीन माह होने को हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ।