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चुनावी मौसम में भी फीका जा रहा खादी का बाजार

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हरदोई। 1921 में असहयोग आंदोलन के बाद भारत की राजनीति में आई खादी का क्रेज इस चुनाव में कम दिख रहा है। खादी के कपड़ों का बाजार चुनावी सरगर्मी में इस बार ठंडा है। अब नेताओं को कुर्ता-पायजामा के साथ सदरी जमती है, खादी से वे दूर हैं। खादी की जगह अब स्टाइलिश चिकन, कॉटन के कपड़ों ने ले ली है।
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देश की राजनीति में खादी का अपना ही स्थान रहा है। खादी के कपड़ों का बाजार चुनाव के मौसम में किसी सहालग से कम नहीं होता है। पिछले चुनावों तक खादी के कपड़ों की खरीद में जबरदस्त उछाल देखी जाती रही है। इस बार हालात बदले हुए हैं। कम ही लोग खादी आश्रम की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं। कोरोना का भी बाजार पर असर पड़ा है। वहीं मल्टीप्लेक्स शोरूम और ऑनलाइन शापिंग ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
इस चुनाव में खादी बाजार के हालात काफी दयनीय हैं। राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोगों की दिलचस्पी खादी में कम होने से बाजार फीका हो गया है। खादी बाजार से जुड़े लोगों की मानें तो आश्रम वाले तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को फोन करके भी आमंत्रित कर रहे हैं। उन्हें अपने आश्रम में आए नए उत्पादों की विशेषताएं बता रहे हैं। लेकिन इन सब प्रयासों का भी कोई खास प्रभाव खादी व्यापार के मुनाफे पर नहीं पड़ रहा है।
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खादी व्यापार प्रचार-प्रसार को ज्यादा तवज्जो नहीं देता है। यही कारण है कि खादी आश्रमों में कपड़ों के रेट, क्वालिटी, फैशन की जानकारी सामान्य लोगों को नहीं हो पाती है। इसके अलावा समय-समय पर खादी वस्त्रों पर आने वाली छूट की सूचना भी लोगों तक नहीं पहुंचती। जबकि मल्टीप्लेक्स शोरूम बढ़-चढ़कर अपना विज्ञापन करते हैं और लोगों का ध्यान खींचते हैं।
शहर में खादी के चार आश्रम संचालित हैं। इनमें भूरज सेवा संस्थान की दो ब्रांच रेलवेगंज और विकास भवन परिसर में हैं। सिनेमा रोड पर स्वराज्य खादी आश्रम में खादी बाजार के उत्पाद उपलब्ध हैं। इसके अलावा एक अन्य खादी बाजार नुमाइश चौराहा के निकट पावर हाउस के सामने गांधी आश्रम के नाम से संचालित है।
कुर्ता - 550 से 1000 रुपए तक
पायजामा- 250 से 650 रुपए तक
शर्ट- 350 से 700 रुपए तक
पैंट- 500 से 1200 रुपए तक
धोती- 350 से 4500 रुपए तक
खादी सिल्क कपड़ा- 490 से 900 रुपए प्रति मीटर तक
सदरी- 700 से 2800 रुपए तक
खादी वस्त्रों के प्रति लोगों की दिलचस्पी कम हुई है। आमतौर पर चुनावों में खादी वस्त्रों की मांग बढ़ जाती थी। खासकर कुर्ते-पायजामे और सदरी की लेकिन इस बार मांग में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। कोविड के प्रभाव की वजह से बाजार में मंदी के हालात हैं।
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- दिनेश भाई, खादी उत्पाद विक्रेता
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