बेनीगंज। कोथावां के ग्राम लालपुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को कथा व्यास राकेश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलेगा।
सर्वव्यापी परमात्मा सबके हृदय में विराजमान है। सुनने, देखने और समझने के साधन भी सबके साथ एक जैसे ही हैं और खाने और त्यागने के साधन भी एक ही है।
कहा कि शारीरिक बनावट भी एक जैसी ही है, सबके लिए हवा, पानी, सूर्य की प्रकाश और जन्म-मरण भी एक ही है, सिर्फ नामों में अंतर है। जिस सच्चा नाम, अमृत नाम को सुनकर सूखे अंडे से शुकदेव जी पैदा हुए, उस नूर को प्रकाश कहें, रोशनी कहें, लाइट कहें सब एक ही चीज है।
वैसे ही परमात्मा कहें, अल्लाह, खुदा, गॉड कहें या महाशक्ति कहें, जो सबके ऊपर शासन करती है, उस महाशक्ति को किसी भी नाम से पुकारें, एक ही बात है।
उस नूर को और गैबी आवाज को सिर्फ वही कान सुन सकते हैं, जो अल्लाह के प्यारे होते हैं, जो परमात्मा के प्यारे होते हैं, उसको महात्मा लोग जान सकते हैं।
कहने मतलब यह है कि आप को यह मनुष्य तन मिला है, जो दुर्लभ है। इसे व्यर्थ मत गंवाइए। इस मौके पर संजय, धीरू, अरविंद, शांति देवी, लक्ष्मी, मेनका आदि मौजूद रहे।