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अब तो विदेशियों की जुबान पर भी है हिंदी

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हरदोई। देश तो छोड़िए विदेशों में भी हिंदी अब गुमनाम नहीं है। कहीं कहीं विदेशों में भी हिंदी को दुलार मिलता है। सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संस्था संवेदना के बैनर तले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और हिंदी भाषा विषय पर बोलते हुए संस्थाध्यक्ष डॉ. ईश्वर चंद्र वर्मा ने ये बातें कहीं।
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उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न प्रांतों में हिंदी भाषा को बोलने समझने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। डॉ. ब्रह्मस्वरूप पांडे ने कहा कि हिंदी एवं संस्कृत भाषा से ही देश का कल्याण हो सकता है। आचार्य डॉ. शिवशरण सिंह चौहान ने कहा कि फेसबुक एवं
व्हाट्सएप पर हिंदी लिखने वालों को वर्तनी की अशुद्धियों से बचना चाहिए व विराम चिह्नों का उचित इस्तेमाल करना चाहिए। इस दौरान सदस्यों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में हिंदी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं को वरीयता देने, तकनीकी, चिकित्सा विज्ञान, विधि शास्त्र आदि का हिंदी/क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित करवाने पर भी चर्चा की। वेद प्रकाश अवस्थी, डॉ. शीला पांडे, अशोक कुमार वाजपेयी, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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