फोटो-09- दुलीचंद चौराहे पर होलिका का पूजन करती श्रद्धालु महिलाएं
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हरदोई। शहर के रेलवेगंज स्थित दुलीचंद्र चौराहे पर होलिका दहन की शुरुआत बाबा चंद्रसेन ने की थी। हरियाणा से करीब 167 वर्ष पहले हरदोई आए चंद्रसेन को आज भी यहां होलिका दहन से पहले याद किया जाता है।
चंद्रसेन परिवार के वरिष्ठ सदस्य गौरीशंकर अग्रवाल, अचल अग्रवाल व सोमेंद्र अग्रवाल ने बताया कि 167 वर्ष पूर्व हरियाणा के नारनौल शहर से बाबा चंद्रसेन पहली बार हरदोई आए थे। उन्हें आश्चर्य हुआ कि जिस हरदोई का नाम होलिका दहन के लिए उनके हरियाणा में प्रसिद्ध है, उस हरदोई में होलिकोत्सव की कोई विशेष धूम नहीं है। उस समय अंग्रेजों का शासन था। उन्होंने हरियाणवी परंपरा के अनुसार दुलीचंद्र चौराहे पर होलिका दहन स्थल बनाया था। चंद्रसेन की पांचवीं पीढ़ी ने 167 वर्षों बाद भी इस परंपरा को दुलीचंद्र चौराहे पर बनाए रखा है।
दुलीचंद्र चौराहे पर शुरू किए गए होलिकोत्सव के 168वें अवसर पर परंपरागत ढंग से लोग शामिल होंगे। बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चंद्रसेन द्वारा चलाई गई हरियाणा की परंपरा के अनुसार अग्रवाल समाज की महिलाओं द्वारा कुकड़ी व गाय के गोबर से बने बड़कुले द्वारा होलिका माता की पूजा की गई। परिवार की पांचवीं पीढ़ी के सदस्य नवीन अग्रवाल व अमित अग्रवाल ने बताया कि इस बार होलिका दहन आधी रात्रि 12.30 बजे पुजारी जी के निर्देशन में पूजन के साथ होगा।