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जमाबंदी में गलत दर लगाई, किसानों की जेब पर बन आई

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हरदोई। किसानों की आय बढ़ाने की कवायद के बीच चकबंदी विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण किसानों की जेब ढीली होने लगी है। बिलग्राम तहसील क्षेत्र के दो गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने के बाद की गई जमाबंदी में हर किसान से निर्धारित दर से अधिक की वसूली हुई है। अब अधिकारी भी मामले की जांच में जुटे हुए हैं।
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किसी भी गांव में जब चकबंदी प्रक्रिया पूरी हो जाती है तब चकबंदी पर होने वाले व्यय की वसूली किसानों से होती है। इसके लिए जोत चकबंदी यानी जमाबंदी तैयार करवाकर तहसील को दे दी जाती है। तहसील से संबंधित अमीनों के जरिए किसानों से जमाबंदी की वसूली होती है। संबंधित क्षेत्र के चकबंदी लेखपाल, कानूनगो और सहायक चकबंदी अधिकारी जमाबंदी तैयार करते हैं। इसी आधार पर बंदोबस्त अधिकारी इसको सत्यापित करते हुए तहसील भेज देते हैं। जनपद में भी अलग-अलग गांवों में चकबंदी चल रही है।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक बिलग्राम तहसील क्षेत्र के ग्राम हरपुरा और दसराइचमऊ में भी चकबंदी के बाद जमाबंदी हो चुकी है। इन दो गांवों के लगभग 600 किसानों की जमाबंदी के बाद अमीनों ने वसूली भी काफी हद तक कर ली। अब पता चला है कि जमाबंदी में होने वाली वसूली की दर (मूल्य) ही गलत है। जिन गांवों में सर्वे कार्य नहीं हुआ वहां 31 रुपये 60 पैसे प्रति हेक्टेयर और जहां सर्वे हो चुका है वहां 34 रुपये 60 पैसे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जमाबंदी वसूली जाती है। हरपुरा और दसराइचमऊ में 31 रुपये 60 पैसे प्रति हेक्टेयर की जगह 34 रुपये 60 पैसे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जमाबंदी करते हुए वसूली की जा रही है।
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अपर जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि अब प्रकरण संज्ञान में आया है। इसकी जांच उपजिलाधिकारी बिलग्राम से कराई जा रही है। बंदोबस्त अधिकारी से भी पूरे प्रकरण की जांच कर आख्या मांगी गई है। अगर जमाबंदी गलत निर्धारित हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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