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ग्राम पंचायतों ने जमा नहीं की सोशल आडिट में निकली 61 लाख रुपये की रिकवरी

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मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में कराए गए कार्यों के सोशल ऑडिट के दौरान जनपद की 1306 ग्राम पंचायतों में निकली 61 लाख रुपये से ज्यादा की रिकवरी अब तक जमा नहीं की गई है। इस पर सोशल ऑडिट सेल से सभी संबंधित विकास खंडों को पत्र भेजकर तीन दिन के अंदर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
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मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों का सोशल आडिट कराया जाता है। 2018-19 में मनरेगा से कराए गए कार्यों का सोशल ऑडिट मई 2019 से मार्च 2020 तक किया गया था। इस दौरान जनपद के 19 विकास खंडों में से 18 की 1306 ग्राम पंचायतों में 61 लाख 45 हजार 832 रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली थी।
इसमें से भी स्पष्ट तौर पर 38 लाख 91 हजार 177 रुपये की अनियमितता हुई थी, जबकि 22 लाख 54 हजार 655 रुपये के कार्य तो मिले थे, लेकिन इसके भुगतान की प्रक्रिया गलत पाई गई थी।
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इस पर जिला विकास अधिकारी ने सभी विकास खंडों के खंड विकास अधिकारियों को मनरेगा उपायुक्त के माध्यम से पत्र भेजकर रिकवरी कराने के निर्देश दिए थे।
बावजूद इसके अभी तक किसी भी विकास खंड से रिकवरी नहीं हो पाई है। अब सोशल आडिट सेल ने एक बार फिर सभी खंड विकास अधिकारियों को रिकवरी की राशि जमा कराने के संबंध में पत्र भेजा है।
सोशल ऑडिट के दौरान सबसे ज्यादा गड़बड़ी शाहाबाद, हरपालपुर और भरखनी विकास खंडों में मिली थी। शाहाबाद विकास खंड में 9 लाख 99 हजार 353 रुपये की स्पष्ट अनियमितता मिली थी, जबकि तीन लाख 92 हजार 532 रुपये के अनियमित भुगतान की भी पुष्टि हुई थी।
कुल 13 लाख 91 हजार 885 रुपये की रिकवरी शाहाबाद में निकली है। इसी तरह भरखनी विकास खंड में कुल 11 लाख 87 हजार 251 रुपये की रिकवरी निकली है।
हरपालपुर विकास खंड में भी 10 लाख 17 हजार 168 रुपये की रिकवरी निकली है। सुरसा विकास खंड में कोई रिकवरी नहीं निकली, जबकि सबसे कम रिकवरी टड़ियावां विकास खंड में 12 हजार 350 रुपये निकली है।
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