पचदेवरा। गर्मी में सिंचाई के लिए किसान नलकूपों पर निगाह लगाए हैं लेकिन हाल ये है कि क्षेत्र में लगे 38 राजकीय नलकूपों में 14 सूखे पड़े हैं। इसके कारण किसानों को 300 रुपये प्रति बीघा तक अतिरिक्त खर्च देकर मक्का की सिंचाई करनी पड़ रही है।
पचदेवरा थाना क्षेत्र में कहीं पाइप लाइन खराब है तो कहीं लो वोल्टेज की समस्या है। नलकूपों की मोटर और ट्रांसफार्मर भी खराब हैं। कई नलकूप सालों से सूखे पड़े हैं। नहरों के बाद राजकीय नलकूप ही सिंचाई का साधन होते हैं।
इन दिनों मक्के व गन्ने की फसल को पानी की जरूरत है लेकिन अधिकतर नलकूप खराब होने से हजारों बीघा फसल प्रभावित हो रही है। फसल बचाने के लिए किसान निजी पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर मजबूर हैं। एक बीघा फसल की सिंचाई में 250 से 300 रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में फसल की लागत बढ़ जाती है।
सात साल से नलकूप बंद, 100 किसानों के 500 बीघा खेत प्रभावित
थाना क्षेत्र के कुरारी गांव का सरकारी नलकूप संख्या 151 सात साल से बंद है। इस नलकूप से 500 बीघा खेत की सिंचाई होती थी। लगभग 100 किसान लाभान्वित होते थे लेकिन नलकूप खराब होने के बाद से किसानों को निजी खर्च से फसल सींचनी पड़ रही है। किसान लल्ला सिंह, रामसेवक और महेश ने बताया कि नलकूप बंद होने की सूचना विभाग को दी गई। कुछ विभागीय कर्मचारी गांव आए और नलकूप ठीक करने की बात कहकर मोटर भी निकाल ले गए।
किसान मकरंद सिंह ने बताया कि खेत की बोरिंग खराब हो गई थी। पास में कोई भी सिंचाई का साधन नहीं है। सिंचाई के अभाव में धान की फसल खराब हो गई। नलकूप सही होता तो नुकसान नहीं होता। किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। हथौड़ा निवासी किसान अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि नलकूप संख्या 216 खराब होने से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल पर्याप्त सिंचाई न होने से प्रभावित है।
लखनऊ तक अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद नलकूप नहीं बन पाया है। मैकपुर के किसान धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि नलकूप संख्या 159 मात्र शोपीस बनकर रह गई है। इसको खराब हुए 10 वर्ष हो गए हैं। सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने किसान परेशान हैं।
नलकूपों के खराब होने के संबंध में शिकायत नहीं मिली है। यदि कहीं नलकूप खराब हैं तो मरम्मत कराई जाएगी।- भानु प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता, नलकूप