बिलग्राम के गड़रियनपुरवा में मृत राजकीय पक्षी सारस का पोस्टमार्टम करते पशु चिकित्साधिकारी की टीम व अन्य
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हरदोई। राजकीय पक्षी सारस की शुक्रवार सुबह आकस्मिक मौत और उसमें बर्ड फ्लू की आशंका के चलते प्रशासन सकते में आ गया। सूचना पर पहुंचे वन अधिकारियों ने जहां फौरी तौर पर पड़ताल की। पशु चिकित्साधिकारी ने पोस्टमार्टम कर विसरा सुरक्षित कर लिया। हालांकि मौत का कारण प्राथमिक दृष्टया निमोनिया बताया गया है। विसरे को वन्य जीव अनुसंधान केंद्र बरेली भेज दिया गया है।
ग्रामीणों ने गड़रियनपुरवा के एक तालाब के किनारे एक सारस को मृत अवस्था में देखा। जिसको देखकर ग्रामीणों में से ही कुछ लोगों ने इसकी सूचना क्षेत्रीय वन रेंज अधिकारी आलोक राय को दे दी। जिसके बाद आलोक राय अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और उन्होंने सारस को मृत पाया और उसके शरीर पर अन्य किसी जीव के कोई चोट आदि के निशान नहीं पाए।
उन्होंने इस घटना के बाबत मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जेएन पांडे को भी सूचना दी। जिसके बाद अलर्ट हुए पशु पालन विभाग के पशु चिकित्साधिकारी विमल कटियार वहां पर पहुंचे और उन्होंने वन विभाग की टीम की मौजूदगी में सारस की मौत का कारण जानने के लिए उसका पोस्टमार्टम करने का निर्णय लिया गया।
पशु चिकित्साधिकारी ने पोस्टमार्टम करने के बाद प्रथम दृष्टया मौत का कारण निमोनिया बताया। फिर भी सतर्कता के चलते विसरा को सुरक्षित कर वन्य जीव अनुसंधान केंद्र बरेली भेज दिया गया। बिलग्राम क्षेत्र के वन रेंज अधिकारी आलोक राय ने बताया कि जो शंका थी वह नहीं पाई गई। इससे पशु पालन विभाग सहित वन विभाग में भी संतुष्टि देखी गई।
वन विभाग और पशु पालन विभाग के अधिकारियों के वहां पहुंचने के बाद शुक्रवार को गड़रियनपुरवा के ग्रामीणों ने एक दूसरे पर राजकीय पक्षी को मारने के आरोप लगाने के शुरू कर दिए। हालांकि पक्षी के शरीर पर कहीं कोई चोट के निशान नहीं थे। पोस्टमार्टम के बाद निमोनिया निकलने पर सारे आरोप निराधार हो गए।
डीएफओ अतुल अस्थाना ने बताया कि घटना की जानकारी वह पल पल लेते रहे। यह घटना भले ही निमोनिया से हुई है लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपनी सातों वन रेंज अधिकारियों को पशु पक्षियों व वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए हैं।
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