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34 अरब बांटने वाली सरकारी बैंकों में कर्मियों का टोटा

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हरदोई। सरकारी बैंकों ने साल दर साल मेहनत कर भले ही जिले में बैंकिंग लेनदेन का 95 फीसदी बोझ उठा रखा हो पर बैंकों की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मी घटते जा रहे हैं। जिले में 10 साल पहले 168 बैंकों में जहां 1800 कर्मी थे, वहीं अब 800 रह गए हैं।
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बैंक के आंकड़ों के मुताबिक जिले में सरकारी बैंकों की करीब 163 शाखाएं हैं। जबकि प्राइवेट बैंकों की संख्या आठ है। बात जमा राशियों की करें तो इन सरकारी पीएसयू बैंक में 699351 लाख जमाराशि है और यही बैंकें 346935 लाख का ऋण भी वितरित कर रहीं हैं। जबकि दूसरी ओर प्राइवेट बैंकों की सिर्फ आठ बैंकों में 45273 लाख जमा राशि है और ऋण 24222 लाख ही वितरित किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग का 95 फीसदी इन्हीं सरकारी बैंकों पर बोझ है।
इसके बाद भी इन बैंकों को मजबूत करने के बजाये साल दर साल कमजोर किया गया है। जिले में सरकारी बैंकों की 163 बैंक शाखाओं में शहरी क्षेत्र में 32 शाखाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 82 शाखाएं हैं। इन बैंक शाखाओं में वर्तमान में करीब 800 की संख्या में ही कर्मचारी बचे हैं। पांच साल पहले यह संख्या 1200 थे और 10 साल पहले करीब 1800 थी। पहले शहरी क्षेत्र और बड़ी शाखाओं में चार अधिकारी सात क्लर्क, तीन चपरासी रहते थे। अब ज्यादातर में दो या तीन अधिकारी, दो क्लर्क और एक चपरासी ही बचे हैं।
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बैंक व शाखाएं
पीएसयू सरकारी, 163
प्राइवेट बैंक, 8
जमा राशि
पीएसयू बैंकें, 699351 लाख
प्राइवेट बैंक, 45273 लाख
ऋण
पीएसयू बैंक, 346935 लाख
प्राइवेट बैंक, 24222 लाख
आरबीआई व अलग-अलग समितियों ने देश में चार-पांच बड़े सरकारी बैंक होने की बात कही है लेकिन छह बैंकों का अभी मर्जर नहीं हुआ है। अभी इन्हीं में से दो के निजीकरण की चर्चा है लेकिन बिल पास होने व मर्जर के बाद बड़ा आकार लेने वाले बैंकों के भी निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। - मनोज सिंह, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस चेयरमैन
बैंकिंग कानून संशोधन बिल के चलते बैंकों के निजीकरण की आशंका से ग्रस्त बैंक कर्मी शाखाबंदी का अंदेशा जता रहे हैं। आने वाले वक्त में स्टाफ और कम किया जा सकता है। उनके काम के घंटे बढ़ सकते हैं। सीधे तौर पर उन पर बोझ बढ़ेगा। - आरके पांडे, संयोजक यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस
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