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Hardoi News: लागत और फैशन में फिट बैठ रहे एल्युमिनियम के दरवाजे-खिड़की

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फोटो-03- दुकान पर एल्युमिनियम की कटिंग करते कर्मचारी। संवाद
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हरदोई। लागत और फैशन में एल्युमिनियम के खिड़की-दरवाजों को लोग पसंद कर रहे हैं। लोग दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान और मकान में एल्युमिनियम के दरवाजे और खिड़की लगवा रहे हैं। एल्युमिनियम के खिड़की-दरवाजों आदि की मांग से कारोबारियों में कारोबार के प्रति उत्साह है।
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व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकान और मकानों में वैसे तो लोग पहले लकड़ी की दरवाजे-खिड़की आदि लगवाते थे, कुछ समय बाद लोगों ने लोहे के खिड़की-दरवाजे लगवाने शुरू कर दिए। समय के साथ बदलाव आया और आधुनिकता की तरफ लोगों ने कदम बढ़ाया। एल्युमिनियम फ्रेम से खिड़की और दरवाजे लगने शुरू हुए। एल्युमिनियम से काम कराने में लागत कम आती है साथ ही फैशन में भी फिट बैठ रहे हैं।
एल्युमिनियम के फर्नीचर बनाने वाले अभिनेष गुप्ता, जफर मियां ने बताया कि लकड़ी के स्थान पर लोग एल्युमिनियम के फर्नीचर को अधिक पसंद कर रहे हैं। बताया कि दरवाजे और खिड़की खुलने वालों के साथ ही स्लाइडिंग में भी बन जाते हैं जिससे कम स्थान में यह खुल और बंद हो जाते हैं। बताया कि एल्युमिनियम के फर्नीचर की डिजाइन और साइज के हिसाब से कीमत तय होती है। वैसे 360 रुपये प्रति स्क्वायर फीट से लेकर 700 रुपये प्रति स्क्वायर फीट तक खर्च आता है।
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सागौन-शीशम की लकड़ी से कम खर्च आता
दुकानों, कार्यालयों और मकानों में लोग लकड़ी के स्थान पर एल्युमिनियम के दरवाजे और खिड़की आदि लगवाना अधिक पसंद कर रहे हैं। इसके दो कारण निकलकर आए हैं। एक तो सागौन-शीशम की लकड़ी मिलना मुश्किल और उनकी कीमतें भी अधिक रहती हैं। वहीं, एल्युमिनियम आसानी से मिल जाता है और खर्च भी कम आता है। बारिश और नमी के कारण दीमक व कीड़े-मकोड़े भी एल्युमिनियम में नहीं लगते हैं। रख-रखाव का भी झंझट नहीं रहता है और एल्युमिनियम पर पेंट कराने की आवश्यकता भी नहीं रहती है।

फोटो-03- दुकान पर एल्युमिनियम की कटिंग करते कर्मचारी। संवाद

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