फोटो-21- घर में गमगीन बैठी मृतक कृष्ण पाल की पत्नी अनीता व अन्य परिजन
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हरदोई। सड़क पर वाहन चलाते समय आपकी जरा सी लापरवाही व जल्दबाजी किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। हादसे में हमसफर का साथ छूटने का दर्द बयां करते हुए पत्नी यही अपील करती है कि ट्रैफिक नियम न तोड़ें। किसी का हमसफर व बेटा खोने का दर्द जिंदगी भर रहता है। सवायजपुर मार्ग पर महरेपुर मोड़ पर खड़े चाचा-भतीजे को तेज रफ्तार बस ने रौंदा था। परिजनों का कहना है कि मोड़ पर गतिअवरोधक (ब्रेकर) बना होता तो दोनों उसके करीब होते। उन्होंने ब्रेकर बनवाए जाने की गुहार लगाई है।
लोनार कोतवाली क्षेत्र के ग्राम महरेपुर निवासी कृष्णपाल (45) खेती करता था। उसके बड़े भाई प्रधानी का चुनाव लड़े थे। 3 मई को वह शहर कोतवाली क्षेत्र के पॉलीटेक्निक में मतगणना के बाद बाइक से अपने भतीजे अंकित केे साथ घर जा रहा था। सवायजपुर मार्ग पर महरेपुर मोड़ के किनारे दोनों बाइक खड़ी कर बात कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आई निजी बस ने दोनों को रौंद दिया था। तेज रफ्तार व चालक की जल्दबाजी हादसे का सबब बनी थी।
11 माह बाद हादसे का मंजर यादकर कृष्णपाल की पत्नी अनीता की आखों में दर्द उभर आया। उनका कहना था कि अगर मोड़ पर गतिअवरोधक बना होता तो बस की रफ्तार कम होती तो शायद आज उसका हमसफर जिंदा होता, उसके बच्चे बेसहारा नहीं होते। हादसे में बेटे अंकित को खोने के बाद मां सदाप्यारी और पिता पूत्तूलाल का बुराहाल है। यही कहते हैं कि हादसे में बेटे को गंवाने का जो दर्द हमें मिला यह दर्द किसी मां-बाप को न मिले। इसके लिए वाहन चलाते समय रफ्तार को काबू में रखें। ट्रैफिक नियमों की अनदेखी न करें।
बस चालक की जल्दबाजी में जीवनसाथी को खोने के बाद अनीता को गहरा घाव मिला है। उसका पति ही परिवार के भरण-पोषण का सहारा था। उसका कहना है कि वह पति की तस्वीर को कमरे में लगाकर जिंदगी काट लेगी।
हरदोई-सवायजपुर मार्ग की महरेपुर मोड़ हादसे का मुख्य प्वाइंट है। यहां पर सड़क घुमावदार होने के चलते आने-जाने वाले वाहन नहीं दिखाई देते हैं। जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने ब्रेकर बनवाए जाने के लिए कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक नहीं बन सका है।
फोटो-22- घर के बाहर बदहवास बैठी मृतक अंकित की मां सदाप्यारी- फोटो : HARDOI