हरदोई। सरसों की खेती में आने वाली लागत के अनुरूप मुनाफा न होने से जिले में किसान इस ओर रुचि नहीं दिखा रहे थे। तेल के दामों में भारी उछाल के बाद अबकी किसानों ने इस ओर रुख किया है। गत वर्ष की अपेक्षा इस बार दो गुने ज्यादा रकबे में सरसों की खेती हुई है।
यदि उत्पादन औसतन ठीक रहा, तो फिर सरसों की खेती किसानों को मालामाल करने वाली साबित होगी। अधिकतर खेतों में सरसों की फसल की कटाई हो चुकी है और मड़ाई की तैयारी चल रही है।
प्रति बीघा औसतन एक से डेढ़ क्विंटल उपज रहने का अनुमान है।
पहले जिले में सरसों की खेती का रकबा 15 से 16 हजार हेक्टेयर रहता था।
किसानों को सरसों की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग गोष्ठियों के साथ तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराता रहा। सवायजपुर क्षेत्र के किसान रामचंद्र बताते हैं कि सरसों की खेती अक्सर घाटे का सौदा बन जाती है।
कहा कि सदी के मौसम में होने वाली अनावश्यक बारिश एवं तेज हवाओं से फसल को पिछले तमाम वर्षों से नुकसान होता चला आया है। बावन क्षेत्र के किसान कौशल बताते हैं कि इस बार भी मौसम की मार रही, मगर तेल के दामों में जिस हिसाब से उछाल आया है।
सरसों की खेती घाटा नहीं मुनाफा दे सकती है। एक क्विंटल प्रति बीघा की उपज से भी लगभग 7 हजार की रकम मिलने की उम्मीद है। बिलग्राम क्षेत्र के किसान दिवाकर ने बताया कि इस बार डेढ़ क्विंटल प्रति बीघा से उपज निकलने का अनुमान है।
किसानों में सरसों की खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले दो गुने करीब 34 हजार हेक्टेयर रकबे में सरसों की खेती हुई है। डेढ़ से दो क्विंटल प्रति बीघा उपज का औसत किसानों के लिए लाभदायक है। कुछ क्षेत्रों में मौसम के वजह से उत्पादन कम रह सकता है।
- नंद किशोर, जिला कृषि अधिकारी