हरदोई। हरपालपुर ब्लाक के कटियारी क्षेत्र चौंसार में ‘कलुआ’ के घर के बाहर हैंडपंप लगा है या नहीं। अब इस हैंडपंप को दुनिया में किसी भी स्थान से बैठकर देखा जा सकेगा। कागजाें पर लग रहे हैंडपंप की स्थिति को जांचने के लिए अब जिले में आधुनिक व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। जिले भर में लगे हैंडपंप को अब जीपीएस की मदद से अधिकारी कहीं से भी देखकर उसकी लोकेशन पा सकेंगे।
इसके अलावा हैंडपंप चालू अवस्था में है या नहीं इसकी जानकारी भी हो सकेगी। हैंडपंपों की लोकेशन सहित यथास्थिति की फीडिंग शुरू हो गई है और काम पूरा होते ही गूगल अर्थ से जिले के हैंडपंपों का ठिकाना ढूंढा जा सकेगा। भीषण गर्मी में लोगों के सामने पेयजल का संकट हर वर्ष पैदा होता है। जिसको दूर करने का सबसे उचित साधन इंडिया मार्का हैंडपंप है। जिनका सबसे ज्यादा प्रयोग ग्रामीण क्षेत्रों में होता है, पर ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंपों में अनियमितता की गई। कई स्थानों पर हैंडपंप हैं नहीं या फिर कई स्थानों पर रिबोर होने लायक हैंडपंप हैं, जबकि कई स्थानों पर कागजों पर हैंडपंप संचालित हो रहे हैं।
हालांकि, अब ऐसी स्थिति पर लगाम लगाने को जिले में हैंडपंपों का आधुनिकता के साथ जोड़ा जा रहा है। जिले भर में लगे हैंडपंपों पर निगरानी अब जिले में बैठे अधिकारी तो अपने दफ्तर से ही कर सकेंगे। वहीं दिल्ली और दुनिया में किसी भी कोेने से जिले के हैंडपंपों की वास्तविक स्थित उनके स्थान के साथ देखी जा सकेगी। जिससे इस बात की खबर हो जाएगी कि अमुक स्थान पर हैंडपंप लगा भी है या फिर कागजों पर ही हैंडपंप लग गया। इसके लिए जिले के सभी हैंडपंपोें की मैपिंग की जा रही है। शासन की ओर से हैंडपंपों की मैपिंग करने का काम नागपुर की एक कंपनी को दिया गया है। जिसके द्वारा जिले के हैंडपंपों की लोकेशन को जीपीएस की सहायता से फीड किया जाएगा।
जिले के हैंडपंपों की आन लाइन फीडिंग का काम शुरू हो गया है। काम पूरा होेते ही गूगल अर्थ से हैंडपंपों की वास्तविक स्थिति आनलाइन देखी जा सकेगी। उधर, राष्ट्रीय पेयजल एवं गुणवत्ता अनुश्रवण एवं निगरानी कार्यक्रम के तहत जिले के सभी हैंडपंपों और पेयजल स्रोतों के पानी की जांच शुरू कराई गई है। जिसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधान की अध्यक्षता में टीम गठित कर पानी टेस्टिंग की किटें दी गईं। इनमें पानी की जांच के साथ ही हैंडपंपों की मैपिंग का काम भी कराया जा रहा है। जिले के कई ग्राम पंचायतों में पानी की जांच का काम हो रहा है। इसी के साथ कंपनी के कर्मियों द्वारा जानकारी एकत्रित कर मैपिंग भी की जा रही है।
इसके बाद उसे आन लाइन प्रक्रिया के माध्यम से गूगल अर्थ पर फीड कर दिया जाएगा। नोडल अधिकारी/डीडीओ अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि किटें जा चुकी हैं और जल निगम विभाग के पास रिपोर्ट भी आने लगी हैं। वहीं हैंडपंपों की मैपिंग का काम भी कराया जा रहा है।
इंसेट
जिले में लगे ब्लाकवार हैंडपंप---
संडीला-3,170, कछौना-2,098, बेहंदर-2,565, कोथावां-2,198, भरावन-3,185, बिलग्राम-1,985, मल्लावां-1,425, सांडी-2,342, हरपालपुर-1,663, माधौगंज-2,545, शाहाबाद-2,779, भरखनी-2,759, टोडरपुर-1,905, पिहानी-2,431, हरियावां-1,964, टड़ियावां-2,718, बावन-2,877, सुरसा-3,290, अहिरोरी-2,902