हापुड़। गन्ने की फसल में बीमारी से उत्पादन पर असर पड़ा है, पेड़ी गन्ना में 20 फीसदी तक उत्पादन कम है। को-0238 प्रजाति के गन्ने में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। रिकवरी पर भी इसका प्रभाव है, क्षेत्रफल पहले से ही कम है ऐसे में उत्पादन पर असर किसानों और चीनी मिलों की परेशानी बढ़ा रहा है।
चीनी मिलों के भुगतान में देरी से गन्ने का रकबा हर साल सिमट रहा है। तीन साल में 4500 हेक्टेयर से अधिक गन्ने का रकबा कम हो गया है। पिछले दो साल से गन्ने की फसल में रोग बढ़ा है। जिस कारण उत्पादन पर बुरा असर है, क्षेत्र में प्रति बीघा 60 क्विंटल से अधिक गन्ना निकलता था जो इन दिनों 20 फीसदी तक कम निकल रहा है। बता दें कि जिले में सबसे अधिक को-0238 प्रजाति का गन्ना बोया गया है। इस प्रजाति में ही अब सबसे अधिक बीमारी है, हालांकि किसानों को सफल बनाने में भी इसी प्रजाति का सहयोग रहा था। अब गन्ना विभाग, चीनी मिल कई वैकल्पिक प्रजातियों के प्रति किसानों को जागरूक कर रहे हैं। लेकिन इसमें कुछ समय जरूर लगेगा। इन दिनों गेहूं बुवाई का भी अंतिम समय चल रहा है, किसान खेत खाली करने में जुटे हैं। उत्पादन कम निकलने से पेड़ी फसल भी जनवरी महीने में ही खत्म होने को है, पौधा गन्ना में भी उत्पादन संतोषजनक नहीं है।
तीन सालों में गन्ने के रकबे की स्थिति
वर्ष क्षेत्रफल उत्पादन प्रति हेक्टेयर
2021 42847 हेक्टेयर 630.36
2022 41946 हेक्टेयर 851.16
2023 38346 हेक्टेयर
इस वर्ष दोनों चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद-
सिंभावली चीनी मिल-63.70 लाख क्विंटल
ब्रजनाथपुर चीनी मिल-29.25 लाख क्विंटल
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-गन्ने की नई प्रजातियों को मिलेगा बढ़ावा-
जिले में गन्ने की नई प्रजातियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। गन्ने का रकबा बढ़ाने का भी प्रयास है, किसान सहफसली खेती भी कर रहे हैं।सना आफरीन खान, जिला गन्ना अधिकारी।