‘एसपी आंटी! हमारी जान बचाइए। स्कूल के वाहनों में जिस तरह हमें घर भेजा जा रहा है, उससे हमारी जान खतरे में है।’ शायद स्कूली वाहनों में भूसे की तरह भरे डरे -सहमे बच्चे कुछ इसी तरह की अपील प्रशासनिक अधिकारियों से करते होंगे।
शहर की हर गली-चौराहे पर स्कूली वाहन मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं लेकिन पुलिस-प्रशासन सब खामोश हैं। नगर के गली मोहल्लों में अनेक स्कूल मानकों को ताक पर रख चलाए जा रहे हैं।
इन स्कूलों में शिक्षा और ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है। बावजूद इसके बच्चों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। आलम यह है कि एक ही ई-रिक्शा में पांच की जगह 15 बच्चों को बैठाया जा रहा है।
टीचर्स के डर से बच्चे चुपचाप वाहन में बैठ तो जाते हैं लेकिन पूरे रास्ते वह सहमे रहते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि ट्रैफिक के दौरान उन्हें हाथ-पैर में चोट लग जाती है। अभिभावक जब स्कूल में इसकी शिकायत करते हैं तो उन्हें बच्चे का नाम काटने की धमकी मिलती है।
हैरत की बात यह है कि जिन रास्तों पर यह वाहन चलते हैं, उसी पर दर्जनों पुलिसकर्मी भी तैनात होते हैं, या डीएम और एसपी का काफिला भी उन्हीं रास्तों से गुजरता है। बावजूद इसके कभी इन वाहनों चालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है।
स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। जान जोखिम में डालकर बच्चों को घर तक भेजा जा रहा है। कई बार इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से की लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा है। वंदना, माता मोहल्ला
मैं बच्चों के ट्रांसपोर्टेशन की पूरी फीस समय पर जमा करती हूं, ताकि उन्हें असुविधा न हो सके। इसके बाद भी स्कूल संचालक बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुयस, कसेरठ बाजार
स्कूल संचालक अपनी जिम्मेदारी पर पर्दा डाल रहे हैं। फीस व ट्रांसपोर्ट का पूरा पैसा लेने के बावजूद बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। मोनिका, अर्जुन नगर
मानक के विरुद्ध स्कूली वाहनों को नहीं चलने दिया जाएगा। संबंधित विभागों को अभियान चलाने और कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मैं खुद भी निरीक्षण करूंगी। अलंकृता सिंह, एसपी
स्कूलों में बच्चों की जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। नगर, खंड शिक्षा अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने व कार्रवाई के निर्देश देंगे। देवेंद्र गुप्ता, बीएसए