सूचना आयुक्त ने लंबित वाद सुलझाने के लिए दिया दो माह का समय
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राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित सभागार में जन सूचना अधिकार के तहत लंबित मामलों की समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों को लेकर नाराजगी जाहिर की। स्पष्ट किया कि आरटीआई का जवाब न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने लंबित मामले निपटाने के लिए दो माह का समय दिया है। बैठक में उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में 54 हजार जन सूचना अधिकार से संबधित वाद लंबित हैं। इनमें हापुड़ में 273 वाद लंबित हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के समक्ष केवल जन सूचना अधिकारी ही उपस्थित हों,
अपने अधीनस्थ अधिकारी को न भेजा जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने छूट देने से मना किया है। यदि जनपद स्तर पर ही जन सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारियों के द्वारा जन सूचना के केस निस्तारित कर दिए जाएं तो इस प्रकार की बड़ी समस्या पैदा नहीं होगी।
प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा अपने दायित्वों को निर्वहन नहीं करने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कम से कम 80 प्रतिशत लंबित वादों का निस्तारण जनपद स्तर पर करने के निर्देश दिए।
यदि आवेदक को 30 दिन में सूचना नहीं मिलती है तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास जाकर अपील करेगा। बैठक में एडीएम रजनीश राय, एसपी अलंकृता सिंह, कलेक्ट्रेट प्रभारी अजय श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक रामनयन यादव सहित सभी जनपद स्तरीय जन सूचना अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य सूचना अधिकारी की बैठक के दौरान एक आरटीआई कार्यकर्ता ने उनसे मिलने का प्रयास किया। कार्यकर्ता जबरन बैठक में घुसने लगा। पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माना।
इसके बाद अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। शाम तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।