भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का 75 लाख रुपये का ओवरड्राफ्ट क्लीयर नहीं करने पर बैंक के अधिकारियों ने महामेधा बैंक (महामेधा अर्बन को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड) का लाइसेंस रद्द करने की संस्तुति करते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को चिट्ठी लिखी है।
साथ ही शहर के सभी बैंकों को पत्र भेजकर यह निर्देश दिया है कि बैंकों में अब महामेधा बैंक का कोई भी चेक न लिया जाए। शीर्ष बैंक की इस कार्रवाई से महामेधा बैंक के अफसरों के होश उड़े हैं।
शहर के बुलंदशहर रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक में करीब 35 बैंकों की क्लीयिरिंग का काम किया जाता है। एक महीना पहले समाशोधन चेकों का समय पर समायोजित न करने के कारण महामेधा बैंक के खाते में 75 लाख रुपये का ओवरड्राफ्ट हो गया।
ओवरड्राफ्ट होने के बाद स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक ने महामेधा बैंक के मैनेजर व अन्य बैंक अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से ओवरड्राफ्ट समायोजित करने के लिए कहा। पर बैंक ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
इस पर स्टेट बैंक की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर महामेधा बैंक का लाइसेंस रद्द करने की संस्तुति की है। एसबीआई सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक को चिट्ठी लिखने के बाद बैंक ने निर्णय लिया है कि शहर के 35 बैंकों में अब महामेधा बैंक का कोई भी चेक नहीं लगाया जाएगा।
साथ ही बैंकों में महामेधा बैंक से किसी भी प्रकार का कोई लेनदेन नहीं किया जाएगा। क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक की गाइड लाइन है कि ओवरड्राफ्ट की क्लीयरिंग शीघ्र होनी चाहिए। साथ ही महामेधा बैंक को अब ब्याज के साथ ओवरड्राफ्ट जमा करना होगा।
उधर, इस संबंध में जिला अग्रणी बैंक के मुख्य प्रबंधक एपी चतुर्वेदी का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। महामेधा बैंक को ओवरड्राफ्ट ब्याज के साथ जमा करना होगा। इस संबंध में वह भी अपनी ओर से कार्रवाई कर रहे हैं।
वहीं, महामेधा बैंक के शाखा प्रबंधक सुरेश गोस्वामी ने बताया कि ओवरड्राफ्ट तो बैंकों में चलता रहता है। यह मामला मैनेजमेंट का है।