हापुड़। सबली निवासी मनुप्रिय त्यागी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षा में 572वीं रैंक पाकर जिले का नाम रोशन कर दिया है। हालांकि इस कामयाबी के पीछे दर्द, पीड़ा, कठोर परिश्रम और मनोबल तोड़ देने वाली घटनाएं भी रहीं, लेकिन मनुप्रिय के हौसले के आगे उनका लक्ष्य नतमस्तक हो गया। अपने आखिरी प्रयास में मनुप्रिय ने परीक्षा उत्तीर्ण की।
दरअसल, सबली में किसान ओमदत्त त्यागी के बेटे मनुप्रिय ने वर्ष 2013 में मोदीनगर रोड स्थित एसबीएम सीनियर सेकंड्री स्कूल से 12वीं की थी। इसके बाद आईआईटी धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग से बी.टैक किया। वर्ष 2018 में ओएनजीसी से उन्हें 20 लाख वार्षिक पैकेज का ऑफर मिला। लेकिन मनुप्रिय ने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। जिसे साकार करने के लिए पिता से बात की। पिता का सहयोग मिलने पर मनुप्रिय ने ओएनजीसी से मिली नौकरी छोड़ दी। पांच बार अदम्य साहस के साथ यूपीएससी की परीक्षा दी।
मनुप्रिय ने बताया कि वर्ष 2021 में जब मैंस परीक्षा दे रहा था, तभी राइटिंग क्रैंप हो गया। पूरी क्षमता के साथ प्रश्नों के उत्तर ही नहीं लिख सका, क्योंकि हाथ ने काम करना छोड़ दिया। परीक्षा पास करने के बाद साक्षात्कार तक पहुंचा। लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ता गया, एम्स में इलाज हुआ। उस बार परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सका।
वर्ष 2023 की परीक्षा में भी उसे दर्द निवारक दवा और बैंड हाथ में बांधकर पेपर हल करना पड़ा। लेकिन साक्षात्कार से दो दिन पहले स्वाइन फ्लू हो गया। किसी तरह खुद को संभालते हुए मनुप्रिय ने साक्षात्कार दिया। जिसका परिणाम मंगलवार को घोषित हुआ, इसमें मनुप्रिय को 572वीं रैंक मिली। यूपीएससी में मनुप्रिय त्यागी का विषय राजनैतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध था।
बधाई देने वालों का लगा तांता-
मनुप्रिय त्यागी की उपलब्धि पर उसके घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। उसके चाचा हरेंद्र त्यागी, नरेंद्र मान, डॉ.राकेश कुमार, संतोष शर्मा, ओमेंद्र भट्ठे वाले, सुजीत त्यागी, प्रशांत, नानक चंद शर्मा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे।
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मनुप्रिय त्यागी की सफलता का राज-
सवाल-मोबाइल, इंटरनेट कितना जरूरी
जवाब-पढ़ाई के साथ मोबाइल, इंटरनेट जरूरी है। मैंने फोन पर न्यूज पेपर, करंट अफेयर्स, ज्ञानवर्धक टेलीग्राम चैनल फॉलो किए। मनोरंजन के तौर पर मोबाइल का प्रयोग जितना कम करेंगे, उतना सफल होने का चांस बढ़ेगा।
सवाल-बीटैक के छह साल तक सफलता नहीं मिलने से क्यों मनोबल नहीं टूटा
जवाब-मेरे पिता ओमदत्त ने मेरा हौसला नहीं टूटने दिया। जब कभी मन निराश होता तो पिता साथ देते। यही कारण रहा कि छठे प्रयास में पूरी मेहनत झोंक दी, अब परिणाम सामने हैं।
प्रश्न-यूपीएससी की तैयारी में समय प्रबंधन कितना जरूरी
उत्तर-यूपीएससी की तैयारी करते समय पढ़ाई के घंटे मायने नहीं रखते। बल्कि समय का प्रबंधन और सिलेबस पूर्ण करने की अवधि मायने रखती है।
प्रश्न-सफलता पाने का मंत्र बताएं
उत्तर-गीता और वेद का मैंने जीवन में अनुशरण किया। कर्म करते रहो फल की चिंता मत करो को जीवन का सार बनाया। परीक्षा में यह मंत्र भी ताकत देता रहा।