एचपीडीए को जुर्माने के 10.21 लाख रुपये ब्याज समेत लौटाने के आदेश
हापुड़। मानचित्र स्वीकृत कराने में देरी पर एचपीडीए द्वारा गाजियाबाद के लोहियानगर निवासी व्यक्ति से वर्ष 2018 में जमा कराई गई 10 लाख 21 हजार 210 रुपये की धनराशि को प्राधिकरण को अब छह फीसदी ब्याज के साथ वापस करना होगा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यह आदेश जारी किया है, साथ ही पांच हजार रुपये मानसिक, आर्थिक, शारीरिक क्षति और तीन हजार रुपये वाद व्यय के भी अदा करने होंगे।
पीड़ित के अधिवक्ता अजय सिंह तोमर ने बताया कि वर्ष 2014 में गाजियाबाद के लोहियानगर निवासी प्रशांक गुप्ता ने पिलखुवा स्थित टेक्सटाइल सेंटर में एचपीडीए से 1815 वर्ग मीटर का प्लॉट लीज पर लिया था। प्रशांक ने वर्ष 2016 में मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए प्राधिकरण कार्यालय में दस्तावेज जमा किए। प्राधिकरण के तत्कालीन अफसरों का कहना था कि प्राधिकरण द्वारा निर्धारित समय के अंदर प्रशांक ने मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया। इसलिए वर्ष 2018 में 10 लाख 21 हजार 210 रुपये की पेनल्टी वसूलते हुए मानचित्र स्वीकृत कर दिया।
अधिवक्ता ने बताया कि वर्ष 2018 में हुई प्राधिकरण की 56वीं बोर्ड बैठक में दो साल की अवधि को बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया। बोर्ड द्वारा प्रस्ताव पास होने के बाद प्रशांक गुप्ता ने प्राधिकरण के अफसरों से पेनल्टी की जमा धनराशि 10.21 लाख रुपये वापसी मांगी, लेकिन प्राधिकरण ने पेनल्टी की धनराशि वापस करने से इनकार कर दिया।
जिसके बाद प्रशांक गुप्ता ने जिला उपभोक्ता वाद-विवाद प्रतितोष आयोग हापुड़ में याचिका दायर कराई। आयोग द्वारा गुण-दोष के आधार पर याचिका का निस्तारण करते हुए प्राधिकरण को वादी से वसूली गई पेनल्टी की धनराशि 10.21 लाख रुपये छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा याचि को आर्थिक और शारीरिक और मानसिक क्षति पहुंचाने के लिए पांच हजार रुपये बतौर मुआवजा और तीन हजार रुपये वाद व्यय के लिए भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं।