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मूल निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन में हुई लापरवाही से बने रोहिंग्याओं के पासपोर्ट

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मूल निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन में हुई लापरवाही से बने रोहिंग्याओं के पासपोर्ट
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हापुड़। पहचान छिपाकर रह रहे दो रोहिंग्या की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ऐसे और लोगों की तलाश में जुट गई है, जिन्होंने यहां के आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवा लिए हैं। अभी तक की जांच में सामने आया है कि इनके मूल निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन में गंभीर चूक हुई है, जिसके कारण ही इनके पासपोर्ट तक बन गए। अभी भी जिले के कई परिवार पुलिस के रडार पर हैं और पुलिस 30 से अधिक लोगों से पूछताछ कर रही है।
पुलिस ने शुक्रवार को पहचान छिपाकर रह रहे दो रोहिंग्या फैय्याज और दिल मोहम्मद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनके पास से पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट जब्त किए थे। वर्ष 2006 से रह रहे दोनों आरोपियों ने मेरठ के मवाना में रहने के दौरान ये आईडी बनवाई थी। अब पुलिस ऐसे अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं। गांव खिचरा में करीब पांच परिवारों के 36 लोग रहते हैं। पुलिस इनके दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस 30 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जिले में रहने वाले ऐसे दूसरों लोगों से भी पुलिस जांच और पूछताछ करेगी।
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एसपी दीपक भूकर ने बताया कि आरोपियों ने पासपोर्ट बनाने के लिए अपनी वर्तमान पता मेरठ के मवाना क्षेत्र का और स्थाई पता यानि मूल निवास असम का दर्शाया था। बड़ी बात यह है कि पासपोर्ट के दौरान मूल निवास का सत्यापन ठीक से नहीं किया गया। किस स्तर पर लापरवाही हुई इसकी भी जांच की जा रही है। कुछ और परिवार पुलिस के रडार पर हैं, जिनके आधार कार्ड और पासपोर्ट फर्जी हो सकते हैं। पुलिस मामले में गंभीरता से जांच कर रही है।
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विदेश यात्रा भी कर आए थे आरोपी-
आधार कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड और तमाम दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। पासपोर्ट बनवाने के लिए तो इससे भी जटिल प्रक्रिया होती है, लेकिन इसके बावजूद भी इनके दस्तावेज बन गए। बड़ी बात है कि इन दस्तावेजों के माध्यम से दोनों रोहिंग्या विदेश यात्रा भी कर चुके हैं।
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