झोलाछापों की दवाओं से बढ़ गई लकवा मरीजों की तकलीफ
हापुड़। गांव, मोहल्लों में झोलाछापों की दवाएं मरीजों की जान पर बन रही हैं। फालिस, लकवा जैसे रोग का शर्तिया इलाज का दावा करने वाले ये हकीम जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। गढ़ रोड सीएचसी में हर महीने 30 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि ज्यादातर झोलाछाप की दवाएं खाने से बीमार पड़े हैं। इन दिनों 55 मरीजों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।
लकवा पड़ने पर शरीर का कोई भी अंग निष्क्रय हो जाता है, जिसका सीधा संबंध नशों से ही होता है। इस मर्ज के इलाज को लेकर बहुत सी भ्रांतियां फैली हैं। लोग एलोपैथी चिकित्सा सुविधा के बजाय नीम, हकीमी के पास जाते हैं।
गढ़ रोड सीएचसी के फिजिशियन डॉ अशरफ अली ने बताया कि सीएचसी में करीब 55 मरीजों लकवे का उपचार चल रहा है। बीमारी के लक्षण होने पर तुरंत परामर्श लें तो पांच से दस दिन में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है, कई बार एक महीने तक का भी समय लग जाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों से पूछताछ में पता चला कि वह महीनों से झोलाछाप की दवाएं खा रहे हैं। लेकिन आराम लगने के बजाय हालत और बिगड़ रही है।
गलत दवाओं के सेवन से अल्सर के रोग लगा
फिजिशियन डॉ अशरफ ने बताया कि लंबे समय तक गलत दवाएं खाने से ऐसे मरीज पेट में संक्रमण, अल्सर के रोगी बन रहे हैं। कई मरीजों में इस तरह के लक्षण देखे गए हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं है।
कोट-
फालिस और लकवा के मरीजों को अस्पताल में बेहतर उपचार दिया जा रहा है। चिकित्सक से परामर्श के बाद दवाओं के सेवन से मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। सीएचसी में उपचार पाकर 20 से अधिक मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं।--डॉ दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक।