15 दिन में हापुड़ के 18 शीतगृह फुल, हजारों मीट्रिक टन आलू बाहर
हापुड़। जिले में आलू भंडारण के लिए मारामारी मची है, 18 शीतगृह महज 15 दिन में भर गए हैं, जिनमें दो लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू रखा गया है। करीब 50 हजार मीट्रिक टन आलू अभी भी बाहर है। जिन किसानों को पर्ची मिल चुकी हैं, उनका नंबर आने में भी चार दिन तक का समय लग रहा है। शुगर फ्री भंडारण तो दूर बीज रखने तक की जगह नहीं बची है, दूसरे जिलों से भी किसान यहां पहुंच रहे हैं।
उद्यान विभाग ने क्रॉप कटिंग सर्वे के दौरान फरवरी महीने में आलू उत्पादन में कमी की संभावना जताई थी, क्योंकि खराब मौसम के कारण आलू का साइज बढ़ ही नहीं पाया था। किसानों ने खोदाई के दौरान 30 फीसदी तक उत्पादन में कमी का दावा किया था। उद्यान विभाग ने माना था कि इस वर्ष शीतगृहों में आलू भंडारण में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
इसी रिपोर्ट पर मंडियों में भी आलू का दाम बढ़ गया था, 800 रुपये तक कट्टा बिका। लेकिन खोदाई शुरू होने के 15 दिन में ही शीतगृहों के भर जाने से बंपर फसल होने की सुगबुगाहट के बाद अब दाम गिरने लगे हैं, अब तक एक कट्टे पर 300 रुपये गिर गए हैं।
उद्यान विभाग ने दावा किया था कि इस बार भी चार हजार हेक्टेयर रकबे में ही आलू की फसल लगी है, लेकिन फसल खोदाई के कुछ ही दिनों में शीतगृह फुल होने से रकबा बढ़ने की संभावना विभाग बता रहा है।
जिले में आलू की स्थिति
शीतगृह--------18
भंडारण क्षमता---2 लाख मीट्रिक टन
रकबा--------4 हजार हेक्टेयर
अनुमानित उत्पादन--2.5 लाख मीट्रिक टन
शीतगृह किराया शुगर फ्री-140 रुपये/कट्टा
शीतगृह किराया सामान्य--130 रुपये/कट्टा।
दाम गिरने से किसान परेशान
आलू के दाम लगातार गिर रहे हैं, ऐसे में किसान रेट चटकने की उम्मीद में ही अपना आलू शीतगृहों में भंडारित करने का प्रयास कर रहे हैं। हर शीतगृह में जाकर भंडारण की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
तीन नए शीतगृह भी नहीं दिला सके राहत
जिले में बीते साल तक 15 शीतगृह थे, जिनके भंडारण की क्षमता 1.80 लाख मीट्रिक टन थी। इस साल तीन नए शीतगृह बने हैं, जो 15 दिन के अंदर ही फुल हो गए हैं। नए शीतगृह बनने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल सकी है।
अनुमान से ज्यादा उत्पादित हुआ आलू
जिले में अनुमान से ज्यादा आलू उत्पादित हुआ है, रकबा भी बढ़ा है। 18 शीतगृह पूरी तरह फुल हो गए हैं। शीतगृहों से अपील की जा रही है कि जिसमें जगह हो वह किसानों का आलू जरूर भंडारित करें।--एसके शर्मा, जिला उद्यान निरीक्षक।