ऑन डिमांड पर वाहन चोरी कर नेपाल भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़
हापुड़। दूसरे राज्यों से वाहन चोरी कर उन्हें नेपाल में ऑन डिमांड बेचने वाले एक अंतरराष्ट्रीय वाहन चोर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। हाफिजपुर और एसओजी की टीम ने गिरोह के सरगना समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चोरी की 15 बाइक, पांच मास्टर चाबी, चोरी में प्रयुक्त उपकरण, दो तमंचे और चार कारतूस बरामद किए हैं।
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि सोमवार रात थाना हाफिजपुर प्रभारी निरीक्षक महेंद्र सिंह और एसओजी प्रभारी संजीव कुमार पुलिस टीम के साथ संयुक्त रूप से क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें वाहन चोरों के आने की सूचना मिली। पुलिस ने बाईपास स्थित सोना पैट्रोल पंप के पास पर बैरिकेडिंग कर चेकिंग शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस को बाइक सवार कुछ संदिग्ध आते दिखाई दिए। रुकने का इशारा करने पर इन लोगों ने भागने का प्रयास किया।
पुलिस ने घेराबंदी करते हुए चार आरोपियों को पक़ड़ लिया। तलाशी के दौरान आरोपियों से अवैध हथियार बरामद हुए। पूछताछ में बाइक भी चोरी की निकली। जिसके बाद पुलिस ने इनकी निशानदेही पर चोरी के अन्य वाहनों को भी बरामद किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जनपद गाजियाबाद के थाना भोजपुर क्षेत्र के गांव अतरौली निवासी सुमित, पिलखुवा क्षेत्र के मोहल्ला रमपुरा निवासी राजा, मोहल्ला अर्जुन नगर निवासी राहुल उर्फ जितेंद्र और जनपद मुजफ्फरनगर के थाना रामराज क्षेत्र के नया गांव निवासी नीशू के रूप में हुई। सुमित इस गिरोह का सरगना है और इसका संपर्क नेपाल में है। यही डिमांड के आधार पर वाहनों को चोरी कराता था और फिर सड़क मार्ग से ये लोग वाहनों को नेपाल बार्डर के आसपास के क्षेत्रों में लेकर पहुंचते थे। यही वाहनों का सौदा होता था। चोरी किए दुपहिया वाहनों को 25 से 30 हजार रुपये की कीमत तक बेचा जाता था। वाहन की कीमत नेपाल से आरोपियों के खाते में आती थी। पुलिस इसकी डिटेल खंगाल रही है।
एसपी से बताया कि सुमित के नेपाल निवासी राजकुमार, अतुल और लक्ष्मी नामक महिला से संपर्क था। ये चोरी के वाहनों को खरीदने का काम करते थे। राजकुमार को नेपाल पुलिस ने कुछ दिन पहले जेल भेजा था। जेल में बंद रहने के बावजूद राजकुमार चोरी के वाहनों को खरीदने का धंधा चला रहा है। व्हाट्स एप मेसेज और फोन के जरिए वह गिरोह के सदस्यों को वाहनों का आर्डर देता था। एक वाहन चोरी करने के लिए गिरोह के सदस्य को दो हजार रुपये मिलते थे।
नेपाल तक सड़क मार्ग से पहुंच जाते थे वाहन
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे चोरी किए गए वाहनों को सड़क मार्ग से ही नेपाल तक भेजते थे। एक वाहन को नेपाल पहुंचाने का इनाम दो हजार रुपये के रूप में दिया जाता था। नेपाल की सीमा से सटे इलाकों में गिरोह के सदस्यों की अच्छी सांठगांठ थी। बार्डर के चार से पांच किलोमीटर के दायरे में आरोपी अपने मुखबिरों को जगह-जगह खड़ा कर देते थे। ताकि, पुलिस के आने का पता चलता रहे। इन्हीं इलाकों से वाहनों को भारत की सीमा पार कर नेपाल भेजा जाता था।