मतनौरा में पकड़ी अवैध शस्त्र फैक्टरी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
हापुड़। बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव मतनौरा के जंगल में बंद पड़े अहाते में चलायी जा रही अवैध शस्त्र फैक्टरी का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस दौरान अंतरराज्यीय गिरोह के एक शातिर हथियार तस्कर को गिरफ्तार किया गया। फैक्टरी से भारी संख्या में अवैध हथियार व उपकरण बरामद किए गए हैं। आरोपी ने चुनाव में दहशत फैलाने के लिए हथियार तैयार करने की बात कबूली है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर, गिरोह के अन्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि बृहस्पतिवार रात थाना बाबूगढ़ प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ क्षेत्र में चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि गांव मतनौरा के जंगल स्थित एक बंद पड़े अहाते में कुछ आरोपित अवैध हथियार बना रहे हैं। सूचना के बाद वह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस को देखकर आरोपियों ने फरार होने का प्रयास किया। लेकिन, पुलिस ने घेराबंदी करते हुए हथियार तस्कर गिरोह के एक सदस्य को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी जनपद मेरठ के थाना किठोर क्षेत्र के गांव राधना निवासी कमरे आलम है। अवैध रूप से शस्त्र बनाने में कमरे आलम माहिर है, वह लोगों को लालच देकर इस धंधे में जोड़ता है। आरोपी के खिलाफ विभिन्न जनपदों के थानों में 18 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
सैकड़ों लोगों को बनाने सिखाए शस्त्र
आरोपी कमरे आलम अब तक सैकड़ों लोगों को शस्त्र बनाना सिखा चुका है, प्रदेश में अलग अलग स्थानों पर इस गैंग के गुर्गे लगे हैं जो हथियार सप्लाई से लेकर डिमांड तक की जिम्मेदारी तय करते हैं। इतना ही नहीं कमरे आलम अवैध हथियारों की बिक्री, शस्त्र फैक्टरी के संचालन व हत्या का प्रयास सहित विभिन्न मामलों में कई बार जेल भी जा चुका है।
ये हथियार हुए बरामद
एसपी ने बताया कि फैक्टरी से 13 तमंचे, तीन अधबने तमंचे, एक देसी रायफल, दस कारतूस, 11 लोहे की नाल, दो खोखा, ड्रिल मशीन, ग्राइंडर मशीन, वेल्डिंग मशीन व हथियार बनाने प्रयुक्त उपकरण बरामद हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि विधानसभा चुनाव को लेकर हथियारों की मांग बढ़ रही है, जिसके चलते वह चोरी छिपे रात के समय हथियार तैयार कर रहा था। पांच से दस हजार की कीमत के बीच अराजक तत्वों को हथियार बिक्री करते हैं। दिल्ली, हरियाणा के अलावा आरोपी गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, सहारनपुर, अमरोहा सहित आसपास के कई जनपदों में मांग के हिसाब से हथियारों की तस्करी की जाती थी।