नलकूप बिल घोटाला - 18 साल से परेशान जिले के तीन हजार किसान
हापुड़। नलकूप बिलों में हेराफेरी कर 220 करोड़ के घोटाले का दंश झेल रहे किसानों को राहत की उम्मीद जगी है। पिछले 18 साल से किसान बिल जमा करने के बाद भी लाखों की गलत बकायेदारी झेल रहे हैं। निगम की ओर से जारी बकायेदारों की सूची में जब पीड़ित किसान अपना नाम और रकम देखते हैं तो उनके होश उड़ जाते हैं। बिल जमा की रसीद दिखाने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल रही थी। जिसके चलते उनकी रातों की नींद भी उड़ी हुई थी।
बिजली निगम के अफसर, कर्मचारियों ने वर्ष 2002 से 04 तक नलकूप बिलों के राजस्व में 220 करोड़ का घोटाला किया। अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए घोटाले का पूरा पैसा किसानों के ही बिल में जोड़ दिया। जिसे 18 साल से किसान बिना वजह ढोते चले आ रहे हैं। अब उच्चस्तरीय टीम ने इस प्रकरण की जांच पूरी कर ली है, जिससे किसानों में उम्मीद है कि जल्द उनके गलत बिल ठीक कर लिए जाए।
पूरा बिल जमा, फिर भी बकायेदार
नलकूप का पूरा बिल हर साल जमा करते हैं, फिर भी उनके बिल में लाखों रुपये की गलत बकायेदारी जोड़ दी गई है। बीते दस साल से लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन राहत नहीं मिली। अब जांच पूरी होने से कुछ राहत की उम्मीद है। - चेतन, किसान।
घोटाले के आरोपियों पर हो कार्रवाई
मेरे नलकूप का हर साल बिल जमा होता है, फिर भी लाखों रुपये की बकायेदारी जुड़कर आ रही है। इसके दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार जल्द किसानों को इस समस्या से राहत दिलाए। - दिनेश, किसान।
बिल माफ हो तो मिले राहत
नलकूप कनेक्शन जब से लिया है बिल जमा करते आ रहे हैं, लेकिन बिलों में लाखों रुपये की फर्जी बकायेदारी जोड़कर भेजी जा रही है। इससे राहत मिलनी चाहिए, कई बार इतनी अधिक बकायेदारी को देखकर सिर चकरा जाता है। - सुभाष, किसान।
इन मामलों में हुई कार्रवाई
* गढ़ डिवीजन में फर्जी रसीदों से 60 लाख से अधिक का हुआ घोटाला ।
* उबारपुर बिजलीघर के अवर अभियंता ने बिना एस्टीमेट हाईटेंशन लाइन शिफ्ट की।
* हापुड़ में मीटर से छेड़छाड़ कर गलत वसूली के मामले में तत्कालीन एसई, एक्सईएन, एसडीओ, जेई के तबादले।
* मीटर में लाखों की रीडिंग स्टोर का मामला पकड़ा।
* दो बिजलीघरों को जोड़ने वाली लाइन गलत तरीके से शिफ्ट, जांच अधूरी।