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नली हुसैनपुर में बुखार से पांच दिन में छह मौत, अस्पतालों में 150 भर्ती

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गांव नली में बुखार को लेकर पंचायत करते ग्रामीण। संवाद - फोटो : HAPUR
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नली हुसैनपुर में बुखार से पांच दिन में छह मौत, अस्पतालों में 150 भर्ती
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हापुड़। गांव नली हुसैनपुर में वायरल बुखार बेकाबू हो गया है, महज पांच दिन में इस गांव के छह लोगों की मौत हो गई है। जिससे गांव में दहशत और मातम का माहौल है। हर घर में मरीज है, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण मरीजों को झोलाछापों से उपचार कराना पड़ रहा है।
कोरोना का संक्रमण कम हुआ तो वायरल बुखार, डेंगू का प्रकोप बढ़ गया। सरकारी अस्पतालों के वार्ड भले ही खाली पड़े हों, लेकिन निजी अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने के लिए बेड तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। हर गांव में बुखार के दर्जनों मरीज देखे जा सकते हैं।
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जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर गांव नली हुसैनपुर में तो बुखार ने कहर बरपाया हुआ है। इस गांव में ऐसा कोई घर नहीं बचा जहां बुखार का मरीज न हो। ग्रामीणों का दावा है कि 150 से अधिक मरीज बाहर के अस्पतालों में भर्ती हैं। सभी मरीजों में एक ही समानता है कि उनकी ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही हैं।
बुखार से मौतें होने के मामले में ग्रामीणों ने बैठक भी की, इसमें पूर्व प्रधान मनोज चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों की घर पर जांच भी नहीं हो रही है। जल्द राहत नहीं मिली तो डीएम से शिकायत की जाएगी।
इन लोगों की हुई मौत
गांव निवासी दीपक (25), गजराज सिंह (39), भिकारी लाल शर्मा (65), परवीन (40), अंगूरी (75), श्रीनिवास (80)।
घर पर ही चल रहा उपचार
सोनवीर सिंह लोधी (35), पूजा (20), संदीप (12), अरूण (15), संजीव कुमार (33), सुमित (18), रामवीर (42)।
मृतकों के घरों में मातम
गांव में फैल रहे बुखार से जवान लोगों की भी मौत हो रही है। दीपक की उम्र महज 25 साल है जिसका 3 साल का एक बेटा है, दीपक की मौत से पूरा परिवार संकट में पड़ गया है। उसके पिता देवेंद्र सिंह की हालत भी खराब है। वहीं, 39 वर्षीय गजराज का बेटा भी छोटा है, उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।
तीन दिन पहले जांच, नहीं मिली रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने गांव में तीन दिन पहले जांच कराई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। अस्पताल के चिकित्सकों का कहना था कि यदि रिपोर्ट पॉजिटिव है तभी मरीजों को बताया जाता है। जबकि मरीजों का यह कहना था कि उन्हें रिपोर्ट की जानकारी तो अवश्य मिलनी चाहिए।
अस्पताल की शोभा बढ़ रहे चिकित्सक
गांव में एक सरकारी अस्पताल है, काफी मिन्नतों के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने यहां चिकित्सकों को भेजा। लेकिन यहां चिकित्सक सिर्फ अस्पताल की कुर्सियों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जबकि घरों में मरीज झोलाछापों से इलाज करा रहे हैं। जिनकी हिम्मत अस्पताल तक आने की नहीं है। चिकित्सकों को इसकी कोई परवाह भी नहीं है।
नए टावर को लेकर फैली चर्चा
गांव में एक नया टावर लगा है, ग्रामीणों का कहना था कि यह टावर 5 जी है। जिसके कारण गांव में बीमारी फैल रही हैं। इस टावर के लगने से पहले कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन अब बुखार बेकाबू हो गया है जो लोगों की जान ले रहा है।
कई जिलों के अस्पतालों में मरीज भर्ती
ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव के मरीज मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, हापुड़, नोएडा के अस्पतालों में भर्ती हैं। रोजाना मरीजों के लिए कपड़े, खाना आदि ले जाने के लिए उन्हें जाना पड़ता है।
सुनिए ग्रामीणों का दर्द-
भाई की बुखार से हो गई मौत
मेरे भाई की मौत बुखार से हुई है, उसकी ब्लड प्लेटलेट्स काफी गिर गई थी। अच्छे अस्पतालों में उपचार भी कराया, लेकिन जान नहीं बचा सके। स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम उनके घर नहीं आई है। - सुधीर कुमार।--फोटो संख्या--16
स्वास्थ्य विभाग नहीं दे रहा ध्यान
गांव में बुखार से हाहाकार मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीम कभी कभी अस्पताल में ही आती है। घर पर जाकर किसी मरीज को नहीं देखा जाता, जिला प्रशासन को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए।--नदीम।--फोटो संख्या--17
जांच रिपोर्ट नहीं दे रहे सरकारी अस्पताल
गांव में तीन दिन पहले बुखार से पीड़ित मरीजों ने जांच करायी थी। लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिल सकी है। चिकित्सकों कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट लैब पर ही जांच करानी पड़ रही हैं।--देवेश।--फोटो संख्या--18
घर-घर में बुखार का मरीज
गांव के घर-घर में बुखार से मरीजों की भरमार है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल से बाहर नहीं निकल रही हैं। रोजाना गांव में मौत हो रही हैं, इतनी मौत कोरोना के समय में भी नहीं हुई थी।--बदन सिंह।--फोटो संख्या--19
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टीम को भेजकर उपचार के दिए निर्देश
नली हुसैनपुर में बुखार के प्रकोप का मामला उनके संज्ञान में है। टीम को अस्पताल में भेजकर ग्रामीणों के उपचार के निर्देश दिए हैं। जिन मरीजों की हालत अस्पताल तक आने की नहीं है, उनकी जांच व दवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में चिकित्सकों को निर्देशित किया जाएगा।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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