यूरिया की कालाबाजारी की सूचना पर 16 प्लाईवुड फैक्टरियों पर छापे
हापुड़। किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाले यूरिया की खपत औद्योगिक इकाईयों में किए जाने की सूचना पर बृहस्पतिवार को कृषि विभाग की टीमो ने 16 प्लाईवुड फैक्टरियों के गोदामों को खंगाला। हालांकि इस तरह का यूरिया किसी फैक्टरी में नहीं मिला। अधिकारियों ने सब्सिडी आधारित यूरिया के इस्तेमाल पर एफआईआर की चेतावनी दी है।
सरकार द्वारा किसानों को फसलों में प्रयोग होने वाले उर्वरकों पर सब्सिडी दी जाती है। जिससे किसान आसानी से उर्वरक खरीद लेते हैं। प्रदेश के कई जिलों में सब्सिडी आधारित यूरिया का प्रयोग औद्योगिक इकाईयों में होता मिला था। हापुड़ में भी इस तरह के गोरखधंधे की सूचना कृषि विभाग के अफसरों को मिल रही थी।
शासन के आदेश पर बृहस्पतिवार को जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार, उप कृषि निदेशक वीबी सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ दिव्या मौर्या के नेतृत्व में अभियान चलाया गया। इस दौरान प्लाईवुड की 16 फैक्टरियों में पड़ताल की गई। गोदामों में पड़े यूरिया की गहनता से जांच की गई। इस दौरान किसी फैक्ट्री में सब्सिडी आधारित यूरिया का प्रयोग होता नहीं मिल सका।
बता दें कि एक सप्ताह पूर्व पीओएस मशीन में स्टॉक का रिकॉर्ड अपडेट किए बगैर ही ट्याला में खाद की बिक्री की जा रही थी। कालाबाजारी के शक में उक्त इफको के ई-बाजार का लाइसेंस कृषि विभाग द्वारा निलंबित किया गया है। हापुड़ तहसील क्षेत्र में 5, गढ़ में 5 और धौलाना तहसील क्षेत्र में 6 फैक्टरियों पर छापे मारे गए।
मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी = जिले में यूरिया की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। सब्सिडी आधारित यूरिया सिर्फ किसानों के लिए है, इसका कारखानों में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा कोई मामला पकड़ में आया तो सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।