आयुष्मान भारत योजना से वंचित 50 हजार गरीबों को मिलेगा इलाज
हापुड़। भारत सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत से जुड़े हापुड़, पिलखुवा, बाबूगढ़ शहरी क्षेत्र के करीब 50 हजार लोगों का डाटा आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद गाजियाबाद से हापुड़ के स्वास्थ्य विभाग को मिल गया है। अब इन लोगों के जिले से ही गोल्डन कार्ड बनाए जा सकेंगे, जिसके आधार पर उन्हें अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार मिलेगा।
लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान योजना शुरू की गई थी। इस योजना में हापुड़ जिले के करीब 53 हजार परिवारों के ढाई लाख लोगों को शामिल किया गया था। पात्रों का चयन वर्ष 2014 की जनगणना की सूची के आधार पर ही किया गया था। इसमें जिले का कोई सुझाव या इनपुट शामिल नहीं हुआ। यही कारण रहा कि योजना में पात्रों का आज तक भी कोई मानक तय नहीं है।
बहरहाल, शहरी पात्रों में से करीब 15 हजार परिवारों का पता जिला गाजियाबाद का दिखा दिया गया। क्योंकि पहले हापुड़ भी जिला गाजियाबाद की ही एक तहसील हुआ करती थी। ऐसे में इन लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिट्ठी तो मिली। लेकिन जिले से उनके गोल्डन कार्ड नहीं बनाए जा सके। ऐसे में इन परिवारों के करीब 50 हजार लोग आए दिन स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगा रहे थे।
सीएमओ डॉ.रेखा शर्मा द्वारा गाजियाबाद के अधिकारियों से इन 50 हजार लोगों का डाटा हापुड़ जिले को सौंपने के संबंध में पत्राचार किया गया। करीब दो साल चली पत्रावली के बाद अब गाजियाबाद ने इन पात्रों का डाटा हापुड़ के स्वास्थ्य विभाग को सौंपा दिया है। अब जिले में ही इन लोगों के गोल्डन कार्ड आसानी से बनाए जा सकेंगे।
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पैनल में ये अस्पताल हैं शामिल
आयुष्मान योजना के तहत जिले के 9 अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है। जिनमें सरस्वती, रामा, जीएस मेडिकल कॉलेज, देवनंदिनी अस्पताल, मधु हॉस्पिटल, तीन सीएचसी और एक सिंभावली में बना आयुष्मान हॉस्पिटल शामिल है।
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अस्पतालों में मिलता है पांच लाख तक का मुफ्त इलाज-
आयुष्मान योजना के तहत पात्रों को पैनल में शामिल अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार मिलता है। अब तक कई गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज इस योजना का लाभ उठाकर स्वस्थ हो चुके हैं। कुछ मरीजों ने योजना के द्वारा ही कूल्हे का भी प्रत्यारोपण कराया है।
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गरीबों को नहीं मिल रहा इलाज
आयुष्मान योजना में शामिल होने का कोई मानक नहीं रखा गया है। इस योजना में गरीब लोग भी शामिल किए गए हैं और करोड़पति भी। गरीबों की बड़ी आबादी आज भी इस योजना से बाहर है, जो आए दिन स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं।
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मरीजों को मिलने वाले उपचार की हो रही मॉनीटरिंग-डॉ दिनेश
आयुष्मान योजना के नॉडल डॉ. दिनेश खत्री ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को मिलने वाले उपचार की मॉनीटरिंग वह खुद कर रहे हैं। समय समय पर अस्पतालों को भी आवश्यक दिशानिर्देश दिए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.रेखा शर्मा ने बताया कि गाजियाबाद से 15 हजार परिवारों का डाटा मंगा लिया गया है। अब इन परिवारों के पात्र लोग जिले में आसानी से गोल्ड कार्ड बनवाकर, आयुष्मान योजना के तहत उपचार पा सकते हैं।