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तीन घंटे में जमींदोज किए सवा सौ साल पुराने अवैध निर्माण

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गढ़ में नक्का कुआं मंदिर से कब्जा हटने के दौरान बेहोश होकर गिरी बुजुर्ग महिला को उठाकर ले जाता रा? - फोटो : GARH
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तीन घंटे में जमींदोज किए सवा सौ साल पुराने अवैध निर्माण
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गढ़मुक्तेश्वर। प्राचीन नक्का कुआं मंदिर की भूमि पर सवा सौ साल पुराना अवैध कब्जा मंगलवार को हटवा दिया गया। प्रशासन की टीम ने भूमि की पैमाइश के बाद तीन बुलडोजर ने तीन घंटे में अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया। इस दौरान वहां रह रहे परिवारों के साथ पुलिस और प्रशासन की टीम से तीखी नोकझोंक भी हुई। एक युवती ने आत्महत्या का भी प्रयास किया।
बताया जा रहा है कि सवा सौ साल से मंदिर की भूमि पर चार परिवारों का कब्जा था। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि करीब 8 दिन पहले पालिका के माध्यम से अवैध कब्जा किए हुए सुरेंद्र सिंह, ब्रह्म सिंह, महेंद्र और नरेंद्र को नोटिस जारी किए गए थे। तीन बार मौके पर पहुंचकर एनाउंसमेंट भी कराया गया। कब्जाधारकों ने दो दिन का समय मांगा था, इसके बावजूद भी कब्जा नहीं हटाया। मंगलवार को पुलिस प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर पहुंच गई। वहां रह रहे परिवारों की कार्रवाई के विरोध में टीम के साथ नोकझोंक भी हुई लेकिन टीम अवैध निर्माण ध्वस्त करने पर अडिग रही। आनन फानन में मंदिर की जगह पर रहने वाले परिवार के सदस्यों ने अपने सामान को बाहर निकालकर सड़क पर रखा। बुलडोजर चलने के दौरान सभी परिवारों के सदस्य बाहर निकल आए और रोते बिलखते हुए शासन प्रशासन से रहने की लिए जगह की मांग करने लगे। इस दौरान एक युवती ने गुस्से में आकर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसको पुलिसकर्मियों ने रोक लिया।
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कुछ लोगों ने बेच दी थी मंदिर की जमीन
प्राचीन नक्का कुआं महादेव मंदिर की 2 बीघा दो बिस्सा भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को तीन जेसीबी ने तीन घंटे तक ध्वस्त किया। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि खसरा नंबर 178 पर मुक्तेश्वर महादेव मंदिर का कब्जा है। प्रशासन के अभिलेखों के अनुसार यह धार्मिक स्थल है। कुछ लोगों ने उस जगह को बेच दिया और खरीदारों ने अपने भवनों का निर्माण करा दिया था, जिसे ध्वस्त कर दिया गया। एसडीएम का कहना है कि मंदिर की भूमि को अवैध रूप से बेचने वालों की सूची भी तैयार की जा रही है। सभी पर कार्रवाई की जाएगी।
गर्मी में बिलखतीं महिलाएं और बच्चे मांगते रहे रहम की भीख
मंदिर की जमीन पर रह रहे परिवार अब सड़क पर आ गए हैं। अपना सामान बाहर रखकर महिलाएं रोती बिलखती रहीं। महिलाएं अफसरों से रहम की भीख मांगती रहीं। वह कह रही थीं कि रहने के लिए कहीं तो हमें जगह दी जाए। सवाल भी करती रहीं कि उनका परिवार अब कहां रहेगा? छोटे बच्चे भी सड़क पर भीषण गर्मी में खड़े होकर रोते बिलखते नजर आए। उन्हें देख आसपास से गुजर रहे लोग भी भावुक हो गए।
साहब हम कहां रहेंगे
इस भवन में ही पूजा पाठ करते हुए हमारी तीन पीढ़ी का समय बीत गया है। आज प्रशासन ने हमको बाहर कर दिया है। हम अब कहां रहेंगे, सड़क पर ही समय बिताना पड़ेगा। - जयावती
हम तो बर्बाद हो गए
इसी स्थान पर रहने के लिए पूरी जिंदगी की कमाई लगा दी, लेकिन प्रशासन ने हमें बाहर निकाल दिया है। यदि प्रशासन इतने पुराने भवनों से बाहर निकाल रहा है, तो हम लोग आगे कहा जाएंगे, हम तो बर्बाद हो गए। - मीनाक्षी
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डेढ़ दशक पहले भी हटाया गया था अवैध कब्जा
नक्का कुआं मंदिर का पांच हजार वर्ष पुराना इतिहास है। करीब सवा सौ साल पहले मंदिर के मुख्य द्वार के बराबर में बनाई गई एक दुकान में लकड़ी का व्यवसाय होता था। धीरे-धीरे मां गंगा के मंदिर समेत नक्का कुआं मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर पशुओं को बांधने का स्थान, आवास और दुकानों का निर्माण करा लिया गया। अवैध कब्जा धारक करीब 20 वर्ष पूर्व अपने परिवार के लोगों के साथ इसी भूमि पर आकर बस गए। करीब डेढ़ दशक पूर्व तत्कालीन एसडीएम सत्यप्रकाश शर्मा ने भी मंदिर की भूमि को खाली कराने का प्रयास किया था। उन्होंने मां गंगा के मंदिर को कब्जा मुक्त कराया था, लेकिन सत्यप्रकाश शर्मा का ट्रांसफर होने के बाद दोबारा कब्जा कर लिया गया।

साहब, अब हम कहां रहेंगे - बच्चे को भूख लगने के दौरान हाथ में दूध की बोतल और तपिश भरी गर्मी में खड़े ह?- फोटो : GARH

गढ़ में नक्का कुआं मंदिर की जगह पर कब्जा करने वालों का सामान भवन से सड़क पर पहुंचाया।- फोटो : GARH

गढ़ में नक्का कुआं मंदिर के पास भवन ध्वस्त करता बुलडोजर।- फोटो : GARH

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